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प्लास्टिक वेस्ट से बनने लगा पोलियस्टर फाइबर

राजस्थान का चौथा प्लांट लगा भीलवाड़ा में10 टन प्लास्टिक वेस्ट को री-साइकिल कर बना रहे फाइबरवाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विट पर दी आदित्य को बधाई
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 29 Oct 2021, 10:20 PM IST

प्लास्टिक वेस्ट से बनने लगा पोलियस्टर फाइबर

प्लास्टिक वेस्ट से बनने लगा पोलियस्टर फाइबर

भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी के टेक्सटाइल उद्योग ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। पर्यटक स्थलों पर फेंके जाने वाली प्लास्टिक बोतलें का फायबर बनाने का प्लांट स्थापित किया गया है। प्लांट पर १५० करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं। इस प्लांट में लगभग १०० टन प्रतिदिन फाइबर का उत्पादन होगा। इसके लिए लगभग १२० टन प्लास्टिक की बोतलों की आवश्यकता होगी। बोतलें देश के हर कोने से यहां लाई जा रही हैं। यह यार्न मिक्स धागा बनाने, कपड़ा बनाने, वाहनों के हुड का कपड़ा बनाने के काम आएगा। प्लास्टिक वेस्ट को मैनेज करना सबके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इससे पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचता है, इसके कारण कई जिंदगियां भी दम तोड़ देती हैं। लेकिन इस नवाचार पर कपड़ा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भीलवाड़ा के जयेश बांगड़ के पुत्र आदित्य बांगड़ के लिए ट्विटर पर लिखा है कि कचरे से सोना निकालने के नवाचार पर बधाई। आदित्य वर्तमान में अजमेर मेयो कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि इस प्लांट को आदित्य के भाई आयुष बांगड़ देख रहे हैं।
तेलंगाना के सीएम कर चुके हैं सम्मानित
कंचन इण्डिया लिमिटेड के निदेशक निलेश बांगड़ ने बताया कि इस नवाचार को लेकर आदित्य बांगड़ को २० अक्टूबर को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने बुलाकर सम्मानित भी किया है। इस कार्यक्रम में आदित्य के साथ आयुष बांगड़ भी था। आदित्य को तेलंगाना में हाइसा इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2021 में सम्मानित करने के साथ सवाल-जवाब भी किए थे।
हर दिन 10 टन री-साइकिल
आदित्य बांगड़ ने बताया कि नानकपुरा में लगाए गए प्लांट से प्लास्टिक वेस्ट से फाइबर तैयार कर रहे हैं। फिलहाल हर दिन 10 टन प्लास्टिक वेस्ट रिसाइकिल कर रहे हैं। एक साल के भीतर ही उन्होंने एक करोड़ रुपए से ज्यादा का टर्नओवर हासिल किया है।
कैसे जन्म लिया और परवान चढ़ा आइडिया
आदित्य ने बताया कि जब वे 10वीं में थे, तब परिवार के साथ चीन जाने का मौका मिला। वहां एक उद्योग में गए, जहां प्लास्टिक वेस्ट से फाइबर तैयार किया जा रहा था। यह काम पसंद आया और यही से दिलचस्पी बढऩे लगी। उन्होंने अपने घर में इस आइडिया को लेकर बात की। चूंकि परिवार पहले से उद्योग से जुड़ा हुआ था, इसलिए आदित्य को भी आसानी से इसकी अनुमति मिल गई। उन्होंने चीन में प्लास्टिक वेस्ट से फाइबर तैयार कर रही कंपनियों से सम्पर्क किया और रिसाइकिल करने वाली मशीनें मंगाई। इसके बाद भीलवाड़ा में ही उन्होंने अपना सेटअप जमाया और उत्पादन प्लांट शुरू किया। एक किलो प्लास्टिक वेस्ट से करीब 800 ग्राम फाइबर निकलता है। इससे यार्न तथा यार्न से कपड़ा तैयार किया जाता है। इस प्लांट में २०० कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह सारा प्रोसेस या वेल्यू एडिशन कंचन इण्डिया लिमिटेड ग्रुप के पास है।
प्रदेश का चौथा प्लांट
प्रदेश में यह चौथा प्लांट है। पहला एलएनजे ग्रुप का रींगस, दूसरा शाहपुरा (जयपुर), तीसरा भीलवाड़ा के लाम्बियाकला तथा चौथा प्लांट नानकपुरा मं संचालित है। इस प्लांट के लिए देश भर से खराब प्लास्टिक की बोतले काम में ली जा रही हंै। इससे पोलियस्टर फायबर बन रहा जो स्पिनिंग मिलों में यार्न बनाने के काम आता है। यह यार्न पहनने के काम आने वाले पॉलिएस्टर, पॉलिएस्टर विस्कॉस कपड़े सहित सोफा, सीट कवर, गद्दों के कवर सहित टेक्निकल टेक्सटाइल के सभी सेगमेंट में काम आता है।