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सौर ऊर्जा निवेशकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: 2022 से पहले लगे प्लांट्स को मिलेगी 7 साल की छूट

- राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला: 2019 की सौर नीति के तहत दी गई छूट को बीच में वापस लेना अनुचित

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Solar energy investors get major relief from High Court: Plants installed before 2022 will get 7 years exemption

सौर ऊर्जा निवेशकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: 2022 से पहले लगे प्लांट्स को मिलेगी 7 साल की छूट

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए प्रदेश के सौर ऊर्जा निवेशकों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपनी घोषित नीति और वादों से इस तरह मनमाने ढंग से पीछे नहीं हट सकती। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि 10 मई 2022 नीति में संशोधन की तिथि से पहले स्थापित हो चुके कैप्टिव और रूफटॉप सोलर पावर प्लांट्स को उनके शुरू होने की तारीख से 7 साल तक बिजली शुल्क में पूरी छूट का लाभ मिलेगा। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने भीलवाड़ा की मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री व विभिन्न सोलर एसोसिएशनों की ओर से दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला

सरकार ने प्रदेश में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 लागू की थी। इसके क्लॉज 16.4 में कैप्टिव सोलर प्लांट लगाने वाले उद्योगों को 7 साल तक बिजली शुल्क से छूट का वादा किया था। इसके तहत प्रदेश के बड़े उद्योगों ने करोड़ों रुपए का निवेश कर सोलर प्लांट लगाए। लेकिन 10 मई 2022 को सरकार ने अचानक नीति में संशोधन कर दिया और यह छूट वापस लेते हुए निवेशकों पर बिजली शुल्क थोप दिया। इसके बाद बिजली कंपनियों ने भारी-भरकम बिल भेजना शुरू कर दिए। निवेशकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत की तल्ख टिप्पणियां

कोर्ट ने माना कि यद्यपि सरकार को जनहित और वित्तीय कारणों से नीतियां बदलने का अधिकार है, लेकिन वह पूर्वव्यापी प्रभाव से उन अधिकारों को नहीं छीन सकती जो निवेशकों को पहले ही मिल चुके हैं। जब सरकार के वादे 7 साल की छूट के आधार पर कंपनियों ने निवेश कर दिया है, तो अब सरकार मुकर नहीं सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे सरकारी वादों को मनमाने ढंग से तोड़ा गया, तो निवेशकों का सरकारी नीतियों से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। यह औद्योगिक विकास के लिए घातक होगा।

औद्योगिक सेक्टर को मिलेगी संजीवनी

इस फैसले का बड़ा असर प्रदेश के उन प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिन्होंने ग्रीन एनर्जी के तहत प्लांट लगाए थे। खासकर टेक्सटाइल, माइनिंग और सीमेंट उद्योगों ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कैप्टिव सोलर प्लांट स्थापित किए थे। इस फैसले से उन सभी को जो 10 मई 2022 से पहले कमीशन हो गए थे, को शुल्क में करोड़ों की राहत मिलेगी। कोर्ट ने सभी सदस्यों को छूट का लाभ लेने के लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना प्रतिवेदन पेश करने की छूट दी है।

उद्योगों के लिए ऐतिहासिक फैसला

टेक्सटाइल सहित अन्य उद्योगों ने सरकार की नीति पर भरोसा कर ग्रीन एनर्जी में करोड़ों रुपए का निवेश किया था। लेकिन बीच में ही छूट वापस लेने से उद्योगों पर भारी आर्थिक बोझ आ गया था। न्यायालय के इस फैसले से उद्योगों को करोड़ों रुपए की राहत मिलेगी। यह फैसला न केवल उद्योगों को संजीवनी देगा, बल्कि भविष्य में भी निवेशकों का भरोसा कायम रखेगा।

आरके जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री