
The city was drenched in devotion: The Kalash Yatra began with the sound of hymns.
भीलवाड़ा शहर के पथिक नगर स्थित पारीक भवन में शुक्रवार को आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था सगतपुरिया वाले जोशी परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का। स्व. रामेश्वर प्रसाद जोशी की प्रथम पुण्य स्मृति में आयोजित इस सात दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ कलश यात्रा से हुआ। पूरा मार्ग 'राधे-राधे' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
कलश यात्रा प्रातः नंदेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई। लाल लहरिया साड़ियों में सजी महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर भजनों पर थिरकती नजर आईं, तो श्वेत वस्त्रधारी पुरुष श्रद्धालु शंखध्वनि के साथ भक्ति भाव में डूबे दिखे। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा और आतिशबाजी कर श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाए। यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई पारीक भवन पहुंचकर धर्मसभा में तब्दील हो गई।
कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ से डॉ. विजय कृष्ण पारीक ने श्रीमद् भागवत महापुराण के आध्यात्मिक महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कोई साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का शाब्दिक विग्रह है। महर्षि वेदव्यास ने आत्मशांति और लोक कल्याण के लिए इसकी रचना की थी, जो कलियुग में मानव को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर भक्ति का मार्ग दिखाती है।
भेरूलाल जोशी एवं समस्त जोशी परिवार की ओर से आयोजित इस कथा में पंडित मुरली मनोहर शर्मा और पंडित नंदलाल शर्मा के सानिध्य में मूल पारायण एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। मीडिया प्रभारी बाल गोविंद व्यास ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक चलेगी। समापन 15 जनवरी को होगा।
कलश यात्रा और कथा के शुभारंभ अवसर पर विट्ठल शंकर अवस्थी, पार्षद सत्यनारायण शर्मा, निंबार्क आश्रम की नीलम शर्मा, पारीक परिषद के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन पारीक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम छापरी, राधेश्याम हजीवास, राजेंद्र पारीक, सुनील जोशी, श्याम सुंदर पारीक और युवा अध्यक्ष सुरेंद्र पोलिया सहित बांसवाड़ा के मां त्रिपुरासुंदरी ट्रस्ट के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Published on:
09 Jan 2026 08:43 pm
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