26 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भगवान नेमीनाथ का वैराग्य देख छलक उठी श्रद्धालुओं की आंखें

रथ को मोड़कर, कंगन को तोड़कर, तुम तो चले, मैं कहां जाऊंगी…’ जैसे ही यह मार्मिक भक्ति गीत गूंजा, पूरा पांडाल भाव-विभोर हो उठा। संगीतकार की मधुर स्वर लहरियों के बीच जब 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ (नेमीकुमार) की बारात और उनके वैराग्य का दृश्य साकार हुआ, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम हो […]

2 min read
Google source verification
The devotees' eyes welled up with tears upon seeing Lord Neminath's renunciation.

The devotees' eyes welled up with tears upon seeing Lord Neminath's renunciation.

  • आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में श्रीसिद्ध चक्र मण्डल विधान: 6वें वलय की पूजा में अर्पित किए 256 अर्घ्य, नंदीश्वर द्वीप के कराए दर्शन

रथ को मोड़कर, कंगन को तोड़कर, तुम तो चले, मैं कहां जाऊंगी…' जैसे ही यह मार्मिक भक्ति गीत गूंजा, पूरा पांडाल भाव-विभोर हो उठा। संगीतकार की मधुर स्वर लहरियों के बीच जब 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ (नेमीकुमार) की बारात और उनके वैराग्य का दृश्य साकार हुआ, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं। अवसर था आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे श्रीसिद्ध चक्र मण्डल विधान पूजन का। इस दौरान सुभाष एवं मीना हुमड़ ने भगवान नेमीनाथ के वैराग्य का इतना सजीव और मार्मिक चित्रण किया कि उपस्थित समाजजन भक्ति और वैराग्य रस में डूब गए।

146 कर्मभेदों के नाश की भावना, चढ़ाए 256 अर्घ्य

महायज्ञनायक महेन्द्र सेठी ने बताया कि विधान के तहत गुरुवार को पंडित जयकुमार जैन के निर्देशन में छठे वलय की पूजा संपन्न हुई। इस विशेष अनुष्ठान में श्रावक-श्राविकाओं ने दर्शनावरणीय, ज्ञानावरणीय, अन्तराय एवं नामकर्म सहित 146 कर्मभेदों के नाश और सिद्धत्व स्वरूप को प्राप्त करने की भावना भाई। इसके साथ ही, लोकाग्रस्थित सिद्धपरमेष्ठी की पूजा-अर्चना करते हुए भगवान को 256 अर्घ्य अर्पित किए गए।

नंदीश्वर द्वीप के दर्शन कर शांति में लीन हुआ वातावरण

विधान के दौरान पंडित जयकुमार जैन ने जब आठवें नंदीश्वर द्वीप के 52 जिन चैत्यालयों में विराजित जिनप्रतिमाओं का ध्यान कराया और श्रद्धालुओं को भावपूर्वक दर्शन कराए, तो सम्पूर्ण वातावरण परम शांति और प्रभुभक्ति में लीन हो गया। पंडित जैन ने कहा कि प्रभु की सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति है कि वह पाप को पुण्य में परिवर्तित कर देती है। इसके प्रभाव से शत्रु भी मित्र के समान बन जाते हैं और भयंकर से भयंकर रोगों का भी क्षय हो जाता है।

अभिषेक के लिए लगी लंबी कतारें

विधान के प्रारम्भ में भगवान आदिनाथ पर प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य महावीर, सरिता एवं सौरभ झांझरी परिवार को मिला। इस दौरान प्रभु का अभिषेक और दर्शन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। सम्पूर्ण मंदिर परिसर 'जय जिनेन्द्र' और भजनों की गूंज से चैतन्यमय रहा।