
The future of students is entangled in the complexities of the academic year's mathematics curriculum.
प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए इस बार 'पढ़ाई की परीक्षा' काफी कठिन होने वाली है। शिक्षा विभाग ने नए सत्र (2026-27) को 1 अप्रेल से शुरू करने की कवायद में वर्तमान सत्र के शैक्षिक पंचांग (शिविरा) में बड़ा बदलाव किया है। इस संशोधन के कारण 9वीं और 11वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं अपने निर्धारित समय से करीब 46 दिन पहले आयोजित की जा रही हैं।
परीक्षाएं जल्दी होने के कारण सबसे बड़ी चुनौती पाठ्यक्रम पूरा करने की है। वर्तमान में 5 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश चल रहे हैं। अवकाश समाप्त होने के बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों के पास पहले निर्धारित 82 कार्य दिवसों के मुकाबले अब केवल 48 दिन ही शेष रहेंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि कार्य दिवसों में भारी कटौती के बावजूद शिक्षा विभाग ने सिलेबस कम करने से साफ इनकार कर दिया है।
शिक्षा सत्र 2025-26 के प्रारंभिक खाके के अनुसार, 1 जुलाई से 15 मई तक स्कूलों में कुल 235 दिन पढ़ाई होनी थी। लेकिन अब सत्र को 1 अप्रेल से शुरू करने के कारण अप्रेल और मई के करीब 35 शैक्षिक दिवसों की कटौती हो गई है। पूरे सत्र का विश्लेषण करें तो विद्यार्थियों को प्रभावी रूप से पढ़ाई के लिए साल भर में 200 दिन भी नसीब नहीं हुए हैं।
राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू हो रही हैं और नियमानुसार बोर्ड परीक्षार्थियों को परीक्षा से 14 दिन पहले 'प्रिपरेशन लीव' (तैयारी अवकाश) दिया जाता है। ऐसे में 1 फरवरी से उनकी छुट्टियां हो जाएंगी। पूर्व में प्रस्तावित 5-7 फरवरी के थर्ड टेस्ट को अब जनवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित कराने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा विभाग ने शीतकालीन अवकाश को 7 दिन से बढ़ाकर 12 दिन (25 दिसंबर से 5 जनवरी) कर दिया है, लेकिन इसमें भौगोलिक परिस्थितियों का ध्यान नहीं रखा गया। पश्चिमी राजस्थान में दिसंबर के मुकाबले जनवरी में सर्दी और मावठ का असर अधिक रहता है। शिक्षा विभाग को मौसम विभाग से समन्वय स्थापित कर छुट्टियों की तिथियां तय करनी चाहिए, ताकि पढ़ाई का नुकसान भी न हो और बच्चों को राहत भी मिले।
राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतीशील) के प्रदेश अध्यक्ष नीरज शर्मा का कहना है कि नए सत्र को समय पर शुरू करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बिना सिलेबस कम किए कार्य दिवसों में 40 प्रतिशत की कटौती करना विद्यार्थियों और शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगा। विभाग को चाहिए कि या तो सिलेबस में रियायत दे या एक्स्ट्रा क्लास का कोई रोडमैप तैयार करे।
Published on:
31 Dec 2025 08:56 am
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