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बीस साल और 255 प्रत्याशी

किसी को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारा तो कोई पार्टी के खिलाफ जा डटा। कई ऐसे भी हैं जो सियासी सुर्खियों में आने की मंशा से ताल ठोक देते हैं। ऐसे मामले भीलवाड़ा जिले में भी हैं। इससे प्रत्याशियों का आंकड़ा बढ़ जाता है। Twenty years and 255 candidates
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बीस साल और 255 प्रत्याशी

बीस साल और 255 प्रत्याशी

भीलवाड़ा जिले के विधानसभा क्षेत्र में चार चुनाव के दौरान 255 प्रत्याशी मैदान में उतरे। वर्ष-2008 के चुनाव में जिले से सर्वाधिक 18 प्रत्याशी भीलवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे। इनमें आठ निर्दलीय तो दस राजनीतिक दलों के प्रत्याशी थे। इस चुनाव में दो बैलेट पेपर का उपयोग निर्वाचन अधिकारी को करना पड़ा। Twenty years and 255 candidates


जिले में इवीएम का उपयोग वर्ष 2013 से शुरू हुआ। वर्ष 2018 के चुनाव में सर्वाधिक 17 प्रत्याशी भीलवाड़ा विधानसभा सीट से उतरे। इनमें आठ निर्दलीय थे। जिला निर्वाचन विभाग को इवीएम एवं कंट्रोल यूनिट के अतिरिक्त दो बैलेट यूनिट का इस्तेमाल करना पड़ा। निर्वाचन अधिकारी बताते हैं कि बैलेट यूनिट में अधिकतम सोलह नाम दर्ज हो सकते हैं। इनमें पन्द्रह प्रत्याशी व आखिरी नोटा होता है। प्रत्याशी की संख्या पन्द्रह से अधिक होते ही अतिरिक्त बैलेट यूनिट लगानी पड़ती है। जिले में अभी तक एक बार ही वर्ष 2018 के चुनाव में हुआ है।

वर्ष 2003 में थे 40 प्रत्याशी

जिले के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष -2008, 2013 व 20018 के विधानसभा में कुल 215 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इनमें वर्ष वर्ष-2018 में 75, वर्ष 2008 में 64 व 2008 में सर्वाधिक 76 थे। वर्ष-2003 में जिले में सात के बजाए आठ विधानसभा थी और इस साल 40 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इवीएम के उपयोग के साथ ही जिले में नोटा पर भी वर्ष-2023 के चुनाव से बटन दबने लगा है।

पांच से हो गए दस हजार
सामान्य जाति के उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क 10 हजार रुपए है, जबकि आरक्षित वर्ग के लिए नामांकन प्रपत्र का शुल्क पांच हजार रुपए है। पूर्व के विधानसभा चुनाव में यह शुल्क सामान्य जातियों के उम्मीदवार के लिए 5 हजार रुपए था, जबकि आरक्षित जातियों के उम्मीदवारों के लिए ढाई हजार रुपए था। जमानत राशि कम होने से पूर्व के चुनाव में कई लोग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरते थे और नामांकन पत्र मान मनुहार के बाद भी नहीं उठाते थे।

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