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राजस्थान के इस जिले में सरकार के छह अरब पर ताला, पानी की कमी के चलते फिर शुरू हुआ खुले में शौच, स्वच्छता अभियान हुआ तार—तार

4 लाख 87,347 शौचालय पर छह अरब रुपए खर्च हुए इनमें अधिकतर पर ताले लगे हैं या स्टोर रूम का काम कर रहे हैं

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water crisis in bhilwara

water crisis in bhilwara

सुरेश जैन. भीलवाड़ा।

जिले की 384 पंचायतों में 4 लाख 87,347 शौचालय बनाए गए, जिन पर करीब छह अरब रुपए खर्च हुए। इनमें अधिकतर पर ताले लगे हैं या स्टोर रूम का काम कर रहे हैं। वजह है-पानी की कमी। कमी इतनी है कि जिले के 50 गांवों में पीने तक को पानी नहीं है। एेसे में शौचालयों के लिए पानी कहां से लाए, यह बड़ी चुनौती है।

हालांकि प्रशासन ने जिले की सभी पंचायतों को शौच मुक्त (आेडीएफ) कर रखा है। जिले में हुरड़ा, बनेड़ा, आसीन्द, शाहपुरा सहित कई पंचायतों के दर्जनों गांवों में पेयजल संकट है। लोगों का कहना है कि पानी नहीं है। दैनिक जरूरतों के लिए कब तक टैंकर मंगावाए? शिकायत के बावजूद जलदाय विभाग व पंचायत राहत नहीं दे रहा।

जालमपुरा : खुले में करते हैं शौच
हुरड़ा के जालमपुरा में पेयजल संकट है। करीब 6 हजार की आबादी वाले इस के लोगों को पानी उपलब्ध नहीं हो सका है। अटलपुरा, केलू जी का खेड़ा, माताजी का खेड़ा में भी पेयजल संकट है। क्षेत्र की सीतादेवी, प्रेम देवी व चंद्रकला ने बताया कि पीने को पानी नहीं मिल रहा तो शौचालय कहां से काम लेंगे? महिलाओं ने बताया कि उन्होंने जैसे-तैसे शौचालय बनाए, लेकिन इनका भुगतान नहीं आया। जलसंकट के चलते अंधरे में जंगल में शौच को जाने को मजबूर हैं।

सरदार नगर : जेवर की तरह सहेजते हैं पानी
बनेड़ा के सरदारनगर में लोग घरों में पानी को जेवर की तरह छिपा कर रखते हैं। इस गांव में 5-10 में मात्र 15 मिनट पानी आता है। जिससे पीने का पानी भी पूरा नहीं भर पाते। लिहाजा पानी छुपाकर रखते हैं। गांव के भूरेलाल गाडरी ने बताया कि पानी की समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत कराया पर हुआ कुछ नहीं। पुष्पा देवी ने बताया कि हैंडपंप खराब है। महिलाएं दो-तीन किमी पैदल चलकर जंगल से पानी लाती है। ऐसे में शौचालयों का उपयोग बंद कर दिया है।

करजालिया : वार्ड 3 में पेयजल संकट गहराया
जिले के करजालिया गांव के वार्ड नंबर 3 में पेयजल संकट अभी गहरा गया है। गांव की एकमात्र बोरिंग भी खराब पड़ा है। ऐसी स्थिति में लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि सुबह से ही सभी कार्य को छोड़कर पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। गांव से 2 किलोमीटर दूर मामादेव हैण्डपम्प से पानी लाना पड़ रहा है। कुछ लोग पानी के टैंकर मंगवा रहे है। इस समस्या के चलते शौचालयों का उपयोग करना बन्द कर दिया है।