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इस बार चांदनी रात में क्या होगा, यहां जानिए

राजस्थान के वन क्षेत्र में एक साल के दौरान किस प्रजाति के वन्यजीवों का कुनबा बढा है और किनका घटा है। इसका हिसाब-किताब आगामी पांच मई को पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग समूचे प्रदेश में संर क्षित वन क्षेत्र में वाटर हॉल पर नजर रखेगी। वन्यजीव प्रेमी भी अपना पंजीयन करवाकर इसमें शामिल हो सकेंगे।

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इस बार चांदनी रात में क्या होगा, यहां जानिए

इस बार चांदनी रात में क्या होगा, यहां जानिए

राजस्थान के वन क्षेत्र में एक साल के दौरान किस प्रजाति के वन्यजीवों का कुनबा बढा है और किनका घटा है। इसका हिसाब-किताब आगामी पांच मई को पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग समूचे प्रदेश में संर क्षित वन क्षेत्र में वाटर हॉल पर नजर रखेगी। वन्यजीव प्रेमी भी अपना पंजीयन करवाकर इसमें शामिल हो सकेंगे।

हर साल की तरह इस बार भी वन विभाग की ओर से पांच मई को बुद्ध पूर्णिमा के दिन वाटर हॉल पद्धति से वन्यजीवों की गणना की जाएगी। इसके लिए हर पॉइंट पर वनकर्मियों को तैनात किया जाएगा। कई जगह ट्रेप कैमरों का सहयोग भी लिया जाएगा। चित्तौड़गढ़ जिले में सीतामाता अभयारण्य व बस्सी अभयारण्य सहित कई जगहों पर वन्यजीव गणना की जानी है। इसी प्रकार भीलवाड़ा जिले में हमीरगढ़ इको पार्क समेत छह रेंज में भी वन्य जीव गणना होगीद्य। वन्य जीव प्रेेमी और विद्यार्थी भी इसमें शािमल हो सकेंगे।

दो मई तक होगा पंजीयन

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार वन्यजीव गणना को लेकर वन्यजीव प्रेमी और विद्यार्थी दो मई तक पंजीयन करवा सकेंगे। हर वॉटर हॉल पर चौबीस घंटे के लिए दो व्यक्ति तैनात रहेंगे। पंजीयन का कार्य उप वन संरक्षक कार्यालय सहित सभी रेंज कार्यालय में हो सकेगा। वन विभाग चिंहित वाटर हॉल को भी अब पानी के टैंकरों की मदद से भरवाएगा। वहीं हिंसक वन्य जीव के क्षेत्रों में विभाग मचान भी बनाएगा।

जिन वन्यजीवों की गणना की जाएगी, उनमें पैंथर, सियार, जरख, नीलगाय, जंगली सूअर, बिल्ली, लोमड़ी, सियाहगोश, भेडिय़ा, भालू, बिज्जू, रोजड़ा, सारस, गिद्ध आदि शामिल है।