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भीनाय की बावड़ी — जिसमें 114 कलात्मक खम्भे व 200 कमरे हैं

काछोला। भीलवाड़ा जिले के काछोला क्षेत्र के राजगढ़ गांव से लगभग छह किलोमीटर दूर एक ऐसी बावड़ी है, जो अपने कलात्मक 114 खम्भे व 200 भव्य कमरों के लिए प्रसिद्ध है। कला एवं वैभव से समृद्ध इस बावड़ी को भीनाय की बावड़ी नाम से जाना पहचाना जाता है लेकिन राजकीय उपेक्षा के चलते अब यह बावड़ी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। When will the government repair historic buildings in Bhilwara

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When will the government repair historic buildings in Bhilwara

When will the government repair historic buildings in Bhilwara

काछोला। भीलवाड़ा जिले के काछोला क्षेत्र के राजगढ़ गांव से लगभग छह किलोमीटर दूर एक ऐसी बावड़ी है, जो अपने कलात्मक 114 खम्भे व 200 भव्य कमरों के लिए प्रसिद्ध है। कला एवं वैभव से समृद्ध इस बावड़ी को भीनाय की बावड़ी नाम से जाना पहचाना जाता है लेकिन राजकीय उपेक्षा के चलते अब यह बावड़ी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। When will the government repair historic buildings in Bhilwara
सरकार इन ऐतिहासिक बावरियों के संरक्षण के लिए जल स्वालम्बन अभियान के तहत इनका जीर्णोदृधार करवाया जा रहा है परन्तु क्षेत्र के राजगढ़ के निकट कटारिया का खेड़ा के पास यह बावड़ी अपना अस्तित्व खो रही है यह 4 मंजिल वाली ऐतिहासिक बावड़ी अब धीरे-धीरे जर्जर व खस्ताहाल अवस्था में है।

चार मंजिल में बनी भीनाय बावड़ी में प्रवेश के लिए दो विशाल दरवाजे बने हुए है, जिनमें सैकड़ों घुमावदार सीढियां बनी हुई है। कलात्मक खम्भों पर भगवान नटराज, दुर्गा एवं गणेश की सुन्दर प्रतिमाएं उत्कीर्ण है। बावड़ी की भव्यता उसमें बने सभागार, बड़े बरामदे, छतरियां एवं कुण्ड है। पास ही पहाड़ी पर चारदीवारी से घिरा हरूमा रानी का किला निर्मित है, जो समकालीन है। आसपास कई मंदिर है, जिन्हें क्षेत्र के लोग नौ चाकियोंं कहते हैै। When will the government repair historic buildings in Bhilwara

बावड़ी के अंदर लगे शिलालेख पर अरबी भाषा में उत्कीर्ण के आधार पर बावड़ी का निर्माण सम्वत् 1531 में हुआ। अरबी भाषा में उत्कीर्ण शिलालेख अब समय के साथ धुंधला पडऩे लगा है। बावड़ी के निर्माण में पत्थर व चूने का उपयोग लिया गया है।

वास्तुकला के बेजोड़ स्थापत्य तथा वैभवशाली इस बावड़ी को पर्यटन स्थल बनाने के लिए सन् 1991 में सर्वे कराया था। पर्यटन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में इसे पुरातत्व विभाग को सौपने सलाह दी थी, ताकि इसे संरक्षित की जा सके। अगर उस रिपोर्ट पर अमल किया जाता तो यह बावड़ी आज पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र होती।

आसपास के मार्गों पर इस बावड़ी की ऐतिहासिकता तथा कलात्मकता सम्बन्धी बोर्ड लगाने के सुझााव पर भी अमल नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री स्व.शिवचरण माथुर के भी इस बावड़ी को पर्यटन केंन्द्र बनाने के लिए प्रयास निष्फल रहे। पुरावेत्ता खलील तनवीर ने कहा था कि इसका संरक्षण किया जाना चाहिए।

17 दिसम्बर 2011 को राजस्थान के सेवानिवृïत कस्टम कमीशनर अक्षयकुमार देरासरी एवं उनकी टीम ने तथा सामाजिक कार्यकर्ता कपिल सुखवाल (राजगढ़), किसान नेता नारायणलाल गुर्जर (राजगढ़), कैलाश धाकड़ (काछोला) आदि ग्रामीणों की मौजूदगी में देरासरी व टीम ने इस बावड़ी का अध्ययन किया। When will the government repair historic buildings in Bhilwara

सामाजिक कार्यकर्ता काछोला ठाकुर गोवर्धन सिंह सोलंकी ने बताया कि अगर सरकार इन ऐतिहासिक धरोहर की मरम्मत एवं इनका जीर्णोद्धार करने में असमर्थ है तो इन्हें बचाने के लिए सरकार एवं प्रशासन पुन: राजघराने परिवार को सुपुर्द कर दें, जिससे इस एतिहासिक अतीत को बचाया जा सके। नहीं तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ऐतिहासिक धरोहर महज कागजों में सिमट कर रह जाएगी। When will the government repair historic buildings in Bhilwara