कानाराम मुण्डियार
भीलवाड़ा.
योगगुरू स्वामी बाबा रामदेव ने कहा कि देश ही नहीं बल्कि विश्व योग व आयुर्वेद की तरफ बढ़ रहा है। अब तो राजधर्म निभा रहे पीएम मोदी ही नहीं बल्कि राजनैतिक दलोंं के सभी नेता भी योग कर रहे हैं। भले ही राजनैतिक दलों के नेता यह राजी मन से कर रहे हो या मजबूरी में, लेकिन राष्ट्र निर्माण के लिए यह शुभ लक्षण है। उन्होंने कहा कि मैं तो कहता भी हूं कि योग से अच्छा राजयोग पा सकते हैं। पेश है स्वामी रामदेव के साथ राजस्थान पत्रिका की विशेष बातचीत के अंश-
सवाल : आपने कहा कि कर्म ही धर्म है और योग से राजयोग पा सकते हैं, कैसे ?
जवाब : कर्म को धर्म समझकर कार्य करें तो सफलता निश्चित है। योग से अच्छा राजयोग पा सकते हैं। योग करने में स्वस्थ रहेंगे तो ही देश की अच्छी सेवा कर सकते हैं अब तो योग में भी प्रतिस्पर्धा हो रही है। देश के पीएम मोदीजी योग करने लगे हैं। पहले नेहरूजी, इंदिराजी भी योग करते थे। अब राहुल गांधी, अशोक गहलोत व सचिन पायलट भी योग कर रहे हैं। यह अच्छा दृश्य है। राजी-राजी हो या मजबूरी में सभी राजनैतिक दल अब योग, आयुर्वेद व सनातन को गौरव दे रहे हैं। गौरव का सच सामने आ रहा है, यह शुभ लक्षण है। हम नवयुग व राष्ट्र के नव निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं।
सवाल : आपने एक दशक पहले कई मुद्दों को लेकर देश में बदलाव का बीड़ा उठाया था, उसमें आप कहां तक सफल हुए।
जवाब : जी जरूर हमनें 2009 से 13 तक देश में बड़ा आंदोलन चलाया था। वो हमारा आपातकाल था, योग मेरा पूर्णकालिक धर्म है। जो राजधर्म है उस धर्म के नाते कुछ राष्ट्रीय इश्यू होते है, उसमें अपनी राय भी रखते हैं कि देश में राजधर्म निभा रहे लोग अच्छे होने चाहिए।
सवाल: आजकल आपकी राय खुलकर सामने नहीं आ रही।
जवाब: (स्थानीय भाषा में बोले) अरे सा, थोड़ो सो बोल्यो, बी मायं में भी रोला पड़ ग्या। तो मैं थोड़ो ही बोलूं आजकल। पता नहीं कौनसी चीज ब्रेकिंग बण जावे। ई वास्ते सोचकर बोलता हूं। फिर भी कई बार ऊंची-नीची हो जावे। ।
सवाल: योग व सनातन संस्कारों के जरिए भारत कब तक विश्वगुरू बनेगा।
जवाब: भारत 2047 में जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। तब तक भारत विश्व की आध्यात्मिक, आर्थिक, सामाजिक, सामरिक, बौद्धिक, आई टी, शिक्षा, प्राकृतिक वातावरण में वैश्विक गौरव के रूप में उभरेगा।
सवाल : वर्तमान में देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती किसे मानते हैं।
जवाब : हम सभी मिलजुलकर रहें और राष्ट्र हित व राष्ट्र प्रेम को सर्वोपरि रखें। लेकिन अपने तुच्छ स्वार्थों के कारण किसी भी प्रकार वैचारिक, धार्मिक, राजनीतिक रूप से लड़ाई-झगड़े करवाने जैसी बातें ठीक नहीं है।
सवाल : आप 17 साल बाद भीलवाड़ा आए, क्या बदलाव देखा।
जवाब : पूरे भीलवाड़ा में लोग सनातन, अध्यात्म, योग व पर्यावरण संरक्षण, गौ माता की सेवा एवं सभी वर्ग व समाजों में आपसी प्रेम-भाईचारा की अनूठी मिसाल दिखाई दे रही हैं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सनातन धर्म, योग शिक्षा व संस्कारों में रचे-बसे हुए हैं। इसलिए भीलवाड़ा को उद्योग नगरी व वस्त्रनगरी के साथ-साथ योगनगरी कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं। 18-20 साल पहले भीलवाड़ा हो या अन्य क्षेत्र, चारों तरफ मरूस्थल जैसा नजर आता था। अब चारों तरफ पेड़ ही पेड़ व खुशहाली नजर आ रही हैं। शहर विस्तार व उद्योगों के विकास के साथ यहां सुन्दरता भी बढ़ी है।