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जन्मे भगवान आदिनाथ, गाए बधाए, उल्लास में नाचे श्रद्धालु, रथयात्रा में भीड़

भगवान आदिनाथ के दो दिवसीय जन्मकल्याणक महोत्सव में गुरुवार को भगवान के जन्म की विधियां पूरी की गईं। बद्रीप्रसाद की बगिया मे मुनि प्रतीक सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में बालक के रूप में भगवान आदिनाथ के जन्म विधि पूरी होते ही सभा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने बधाए गाए और आनंद विभोर होकर झूमने-नाचने लगे। इस अवसर पर सभा स्थल पर उपस्थित लोगों ने मंगल धुन और संगीत के साथ खुशियां मनाईं।

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भगवान आदिनाथ जन्मकल्याणक महोत्सव

रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु खुशी से नाचते हुए


भिण्ड. भगवान के जन्म कल्याणक में जन्म का जीवंत मंचन के साथ मुनि प्रतीक सागर महाराज के प्रवचन भी हुए। सुबह साढ़े नौ बजे से बतासा बाजार स्थित चैत्यालय मंदिर में 108 कलशों से भगवान का मस्तकाभिषेक किया गया। दोपहर में आदिनाथ भगवान की विशाल रथ यात्रा निकाली गई। रथयात्रा में मुनि प्रतीक सागर के साथ रविसेन जैन व अन्य समाजजन प्रमुख रूप से शामिल रहे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने रथयात्रा में नाचते-गाते हुए भाग लिया। रथयात्रा बताशा बाजार, चैत्यालय मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार, गोल मार्केट, परेड चौराहा एवं बद्री प्रसाद बगिया पहुंची। यहां दोपहर बार शांतिधारा का आयोजन किया गया।
24 साल बाद गुुरु-शिष्य मिलन, भावुक क्षण आज
जैन आचार्य और मुनि प्रतीक सागर के गुरु पुष्पदंत सागर महाराज 17 मार्च को नगर में मंगल प्रवेश करेंगे। २४ वर्ष बाद सुभाष तिराहे पर गुरु-शिष्य मिलन होगा। यह बेहद भावुक क्षण होगा। मुनि प्रतीक सागर के गुरुभाई आचार्य सौरभसागार महाराज भी 29 वर्ष बाद यहां आ रहे हैं। वे एलक के रूप में भिण्ड आए थे, अब आचार्य बनकर आ रहे हैं। मुनि प्रतीक सागर सकल समाज के साथ आचार्य और गुरुभाई का स्वागत करेंगे। समाज के प्रवक्ता व पार्षद मनोज जैन के अनुसार आचार्य पुष्पदंत ससंघ के स्वागत के लिए मुुनि प्रतीक सागर महाराज सुबह सात बजे ही जैन कीर्तिस्तंभ पर पहुंच जाएंगे। वहां से बैंडबाजों के साथ आचार्य जुलुस में शामिल होकर आएंगे। जुलूस बद्रीप्रसाद की बगिया मेंं पहुंचकर धर्मसभा में तब्दील हो जाएगा।