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नौ साल के बच्चे को कार्डियक अरेस्ट, स्कूल से छुट्टी के बाद बस में हुई थी घबराहट

- इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आने का पहला मामला! डॉक्टर भी हैरान

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भिंड

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Deepesh Tiwari

Dec 15, 2022

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मध्यप्रदेश के भिंड जिले में डॉक्टरों को भी हैरत में डाल देने वाली एक ह्र्दय विदारक घटना सामने आई है। दरअसल यहां एक 9 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत को लेकर डॉक्टर भी चिंता में बने हुए हैं। माना जा रहा है कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आने का शायद यह पहला ही मामला होगा।

जानकारी के अनुसार भिंड के इटावा रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ रहे चौथी के छात्र की गुरुवार दोपहर अचानक तबीयत बिगड़ गई। स्कूल प्रबंधन की सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे और बच्चे को लेकर जिला अस्पताल गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की मौत कार्डियक अरेस्ट के लक्षण से हुई है।

9 साल का मनीष पुत्र कोमल जाटव निवासी जामना रोड अपने छोटे भाई के साथ पढऩे गया था। मनीष ने लंच में पराठा खाया। दोपहर 2 बजे छुट्टी के बाद मनीष अपने भाई के साथ स्कूल बस में बैठ गया। बैठते ही उसे घबराहट होने लगी। बस ड्राइवर ने पिंसिपल को यह बात बताई तो उन्होंने मनीष को बस से उतार लिया। पानी पिलाने का प्रयास किया, लेकिन वह अचेत हो गया। स्कूल संचालक ने मनीष के पिता को सूचना दी। पिता स्कूल पहुंचे और शिक्षकों के साथ बेटे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
मासूम की मौत से माता-पिता और दादा की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। मां को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि उनका लाल जो स्कूल पढऩे गया था, वह अब घर वापस नहीं आ पाएगा।

बच्चे को पहले से कोई बीमारी रही होगी, जिसका परिजनों को भी पता नहीं चला होगा। उसी मौत में कार्डियक अरेस्ट के लक्षण हैं। ऐसा पहला मामला सामने आया है कि इतनी कम उम्र में बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हुई है।
- डॉ. अनिल गोयल, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल भिण्ड

वहीं जानकारों के अनुसार, इस तरह के मामले में जन्मजात बीमारियां एक वजह होती है। जन्म से ही दिल में छेद, आर्टरीज में ब्लॉकेज या उनका कमजोर होना भी वजह हो सकती है। लेकिन इस तरह की समस्याएं जन्म के 15 साल बाद भी सामने आ सकती हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- बच्चों में चक्कर या बेहोशी जैसी समस्याओं का होना।
- छोटे बच्चों में माता का दूध पीते वक्त सांस फूलना या नीला पडऩा।
- बच्चों का विकास दूसरे बच्चों से कम होना।
- बच्चों का घुटने के बल बैठ कर सिर नीचे करना।
- थोड़ा ही खेलने के बाद सांस फूलना व अधिक थक जाना