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LOCKDOWN : डीजल की किल्लत, हार्वेस्टर मिल नहीं रहे, फसल को लेकर किसानों में चिंता

50% सरसों की फसल भी खलिहानों में, जिन्होंने थ्रेसिंग कर ली उनके सामने बेचने का संकट

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भिंड

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Hussain Ali

Apr 07, 2020

LOCKDOWN : डीजल की किल्लत, हार्वेस्टर मिल नहीं रहे, फसल को लेकर किसानों में चिंता

LOCKDOWN : डीजल की किल्लत, हार्वेस्टर मिल नहीं रहे, फसल को लेकर किसानों में चिंता

भिण्ड. ओलावृष्टि, बेमौसम बरसात से तबाही झेल चुके किसानों को लॉकडाउन ने बर्बादी के क गार पर लाकर खड़ा कर दिया है। खेतों में पकी खड़ी एवं खलिहानों में थ्रेसिंग के लिए पड़ी फसल को देखकर किसानों की धडक़नें बढ़ी हुई है। ट्रैक्टर से थ्रेसिंग करने के लिए किसानों को न तो डीजल नहीं मिल पा रहा है और न ही हार्वेस्टर। जिस तरह देश भर में कोरोना संक्रमण का कहर बरप रहा है उसे देखकर हाल फिलहाल हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे।

मार्च के प्रथम सप्ताह में तेज हवा के साथ बरसात और ओलावृष्टि से जिले के कई हिस्सों में सरसों की फसल को 80 फीसदी और गेहंू की फसल को 25 से 30 फीसदी के बीच में नुकसान हुआ था। किसान किसी प्रकार सरसो की फसल को खेतों से काटकर खलिहानों में रख पाया था कि तभी लॉकडाउन शुरू हो गया। 50 फीसदी से अधिक किसानों की सरसों की फसल अभी भी थे्रसिंग के इंतजार में खलिहानों में पड़ी हुई है। जिन किसानों ने किसी प्रकार थ्रेसिंग कर ली है वे जरूरत के बाद भी बेच नहीं पा रहे। जिले में गेहंू की फसल मार्च के अंतिम सप्ताह में कटनी शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते पिछले 10 दिनों से डीजल उपलब्ध नहीं होने से किसान हाथ पर हाथ रखे बैठें है। किसानों की मांग के बाद भी प्रशासन की ओर से डीजल की व्यवस्था नहीं की गई है। सीमांत और लघु सीमांत किसानों ने तो परिवार के साथ हाथ से ही गेहंू की कटाई शुरू कर दी है। विकल्प के आभाव में बड़े कि सानों को लॉकडाउन खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। तेज धूप पडऩे से यदि १५ अप्रैल तक फसल को नहीं काटा गया तो २० फीसदी तक दाने जमीन पर टपक जाएंगे।

हार्वेस्टर के मंाग रहे हैं मनमाने पैसे

गत वर्ष 50 से अधिक हार्वेस्टर ने जिले में गेहंू और सरसों की फसल की कटाई की थी। जबकि इस बार 12 से 15 हार्वेेस्टर ही क टाई का काम कर रहें है। रकवे की तुलना में हार्वेेस्टरों की संख्या कम होने के कारण किसानों से मनमाने दाम वसूल किए जा रहेंं है। गत वर्ष एक बीघा रकवे की कटाई मय भूसा के दो हजार रुपए में हो जाती थी लेकिन इस बार ३ हजार से कम में कोई भी हार्वेेस्टर फसल काटने के लिए तैयार नहीं हो रहा। पड़ोस के गांवों में कटाई कर रहे हार्वेस्टरों के पास कि सान जाते हैं तो उन्हें कम से कम १० दिनों तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है।