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जलजीवन मिशन: कागजों में चालू, हकीकत: कनेक्शन तक नहीं हुए

पीएचई का दावा खोखला: योजना का दस फीसदी काम भी पूरा नहीं

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भिंड

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Vikash Tripathi

Apr 03, 2023

जलजीवन मिशन: कागजों में चालू, हकीकत: कनेक्शन तक नहीं हुए

जलजीवन मिशन: कागजों में चालू, हकीकत: कनेक्शन तक नहीं हुए

भिण्ड. जल जीवन मिशन के तहत स्कूल-आंगनबाडिय़ां में अध्ययनरत छात्रा-छात्राओं तक शुद्ध पानी पहुंचाने का पीएचई का दावा खोखला साबित हो रहा है। कागजों में दो साल से योजना के तहत 50 फीसदी कार्य पूर्ण कर संरचनाओं का संचालन किया जा रहा है। हकीकत में महज 10 प्रतिशत ही चालू हैं बाकी बंद हैं। यहां तक कि स्कूलों में कहीं कनेक्शन नहीं हुए तो कहीं पर स्टार्टर ही नहीं लगे हैं जिससे पानी की सप्लाई नहीं हो रही है।
1888 स्कूलों में पहुंचनी थी योजना
पीएचई ने जिले में 1888 शासकीय स्कूल और 805 आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल योजना को क्रियान्वित करना था। इसके लिए करीब 14 करोड़ रुपए का बजट भी आवांटित किया गया, लेकिन ठेकेदारों ने मनमानी तरीके से काम किया। लहार ब्लॉक में आलमपुर के रजरापूरा, गांगेपुरा, विडरा, भडेरी, कुरथर, गेंथरी, बेलमा, भांपर, रुरई, टीमाऊली, शांसिगड, खिरिया, सायपुरा नं 2, ररुआ नं 2 में पानी की टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं। गांव के लोगों के साथ सरपंचों ने भी प्रयास किए पर पीएचई के लचीले रवैया के कारण बच्चों को मिलने वाली पानी की सुविधा से उन्हें वंचित कर दिया गया है। प्रत्येक योजना पर 1.20 लाख रुपए की राशि व्यय की गई है।
स्कूल-आंगनबाडिय़ों में बिजली कनेक्शन नहीं
जिले में 390 आंगनबाड़ी व 785 स्कूल में पानी की व्यवस्था के लिए शेष रह गए हैं। वहीं आंगनबाड़ी को 383 और स्कूल विभाग को 785 योजना पर काम पूरा कर हैंडओवर किया है। इनमें से दस फीसदी योजना सरपंचों के सहयोग से क्रियान्वित हो रही हैं। विभाग का कहना है कि कुछ स्कूल-आंगनवाडिय़ों में बिजली कनेक्शन नहीं है और बिजली कंपनी से एस्टीमेट मांगा तो 10 हजार रुपए से अधिक की राशि प्रत्येक में बताई गई।
ऐसे जानें योजना की स्थिति
-शासकीय स्कूल ररुआ में 500 लीटर की पानी की टंकी रखकर पाइप लाइन डाल दी है, लेकिन मोटर बंद है। कनेक्शन दिया नहीं है। पानी पीने के लिए बने प्लेटफार्म पर टाइल्स नहीं लगी हैं और न हीं वॉशबेशन है।
-शासकीय स्कूल रुरई में पाइप लाइन तो पूर्व की ही लगी हुई है, लेकिन स्टार्टर गायब है। विभाग के अधिकारी का कहना है कि कुछ खुले परिसरों में असामाजिक तत्व रात में स्टार्टर चोरी कर ले गए हैं।
-गाता आंगनबाड़ी केंद्र पर योजना के तहत टंकी, मोटर, स्टार्टर लगाया था, लेकिन बिजली के अभाव में योजना ठप है। ग्रामीणों ने कई बार इस मामले की शिकायत तक पीएचई विभाग में की है। लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।

कहीं ट्रांसफार्मर रखना जरूरी बताया तो कहीं पर खंभे बढ़ाने की जरूरत बताई गई। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग 10 हजार रुपए से कम खर्च पर कनेक्शन ले सकता है और इसलिए इन शेष स्कूल-आंगनवाडिय़ों में पानी की व्यवस्था नहीं की जा सकी।