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भिण्ड।
जैन संत, गणाचार्य विराग सागर ने रविवारको धर्मसभा में कहा कि आज पर्यूषण का 6 वां दिन हमें जीवन की नई दिशा देने आया है। जिस प्रकार घोड़े के लिए लगाम, ऊँट के लिए नकेल, हाथी के लिए अंकुश और गाड़ी के लिए ब्रेक की जरूरत होती है वैसे ही मानव जीवन में संयम की आवश्यकता होती है। संयम बिना मानव जीवन पशु के तुल्य है।
आचार्य श्री ने बताया कि हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह ये पॉच पाप हैं। इनसे विरक्त होने का नाम व्रत (संयम) है। संयम दो प्रकार का होता है देश संयम और सकल संयम। इन पॉचों पापों का एक देश यानी स्थूल त्याग करने को देश संयम कहते हैं। यह ग्रहस्थ श्रावक को होता है। श्रावक घर में रहता है परिवार का पालन करता है इसलिए उसे बिजनेस, व्यापार करना पडता है जिसमें हिंसा अनिवार्य रूप से होती है। फिर भी ग्राहस्थिक जीवन में जितना संभव है उतने व्रतों का वह पालन करता है। जानकर किसी जीव को नही मारता, जिससे किसी को कष्ट तकलीफ हो ऐसे झूठ का वह त्यागी होता है यथा संभव सत्य वचन बोलता है किसी की चोरी नही करता, अपनी पत्नी को छोड़ शेष स्त्रियों को माँ, बहिन और बेटी की तरह देखता है। अनावश्यक परिग्रह का वह त्यागी होता है। यह श्रावकों का संयम है। किन्तु आज के परिवेश मे श्रावक धर्म को लोग भूलते जा रहे है बीड़ी, तम्बाकू, सिगरेट, शराब जैसी वस्तुए जिन्हे पशु भी खाना पसंद नही करते मनुष्य बड़े चाव से इसे भक्षण कर रहा है। असंयम की पोषक स्त्रियां अपने फैशन मे यह भी नही देखतीं कि हम किन वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। वे तरह तरह की क्रीम पाउडर, लिपिस्टक, नैल्सपेंट (नाखूनी) का प्रयोग करती हैं, सेम्पू लगाती हैं। सोचिए आप हिंसक हैं या अहिंसक? आप जिन वस्तुओं का प्रयोग कर रही हंै उनमें अनेकों जीवों का खून, चर्बी, हड्डी का मिश्रण रहता है। इसलिए इस कृत्रिम बनाबटी सुन्दरता को छोड़ अपनी ववास्तविक सुन्दरता मे जिओ जिसमें भविष्य में पुन: सुन्दर रूप मिल सके। संयम बडी उत्तम वस्तु है। संयम बिना मात्र एक-एक इंद्रियों में आसक्त पतंगा, मछली हिरण आदि प्राणी अपने प्राणों को गवां देते हैं फिर मनुष्य तो पांचों इन्द्रियों में आसक्त होता है। उसे न जाने विषया सक्ति का क्या परिणाम मिलेगा, कितना दुख उठाना पड़ेगा? जिस प्रकार अच्छी से अच्छी कार भी बिना ब्रेक के बेकार होती है वैसे ही ये देव दुर्लभ मनुष्य जीवन संयम बिना बेकार होता है इसलिए हे मानव जीवन मे संयम धारण करो।
आचार्य श्री ने आगे कहा मुनि हर प्राणी नही बन सकता क्योंकि जिसके मन मे वासना रहती है वह नग्न नही रह सकता। छोटे बच्चों में वासना तो नही लेकिन लोक लाज होती है। मुनिराज इन दोनों को जीत लेते हंै तभी वे संयम जीवन मे सफल हो पाते हैं। वे ब्रह्मचर्य महाव्रत के धारी होते हंै संसार की संपूर्ण स्त्री जाति उनके लिए मां बहिन और बेटी की तरह होती है। हम भी अपने जीवन मे यथा शक्ति संयम को धारण करे। धर्मसभा में जिला शिक्षा अधिकारी एस.एन. तिवारी ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर आर्शीवाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का मंगलाचरण कु. श्रद्धा जैन भक्ति नृत्य कु. दीक्षा जैन दीप प्रज्जवलन दिनेश चन्द जैन जिला उपाध्यक्ष भा.ज.पा. पाद प्रक्षालन अखिल जैन मनीष मेडीकल शास्त्र भेंट विराग महिला मंडल ने किया।
सांयकालीन सभा मे हुआ बेटी बचाओ नाटक का मंचन
फोटो नंबर १७- नाट्यमंचन करते कलाकार ।
भिण्ड। पर्यूषण पर्व के अवसर पर गणाचार्य विराग सागर महाराज की प्रेरणा से सांयकालीन सभा मे चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शनिवार को बेटी बचाओ नाटक का मंचन किया गया जिसमें किसी महिला द्वारा रास्ते में लावारिस फेंक दी गई एक बालिका को वहां से जिनालय जाती जैन समाज की महिलाओं द्वारा उठाकर परवरिश हेतु घर ले जाने के मार्मिक प्रसंग को दर्शाया गया। नाटक को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। नाटक के इस मंचन को एडीशनल एस पी अमृत मीणा, नगर पालिका अध्यक्ष कलावती वीरेन्द्र मिहोलिया ई.ई. एस. सी. जैन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देखा। प्रात: कालीन सभा में ध्यान शिविर का आयोजन एवं श्रीजी का अभिषेक पूजन भी किया गया।
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