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1783 आंगनवाड़ी केंद्रों पर बिजली तक नहीं, किराए के भवनों में भी समस्या

तीन से छह साल के बच्चों, धात्री माताओं व किशोरियों को पोषण आहार वितरित करने और पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए संचालित 75 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्रों पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। जबकि इन केंद्रों पर 2.45 लाख के करीब हितग्राही दर्ज हैं। बिजली न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन महज औपचारिक हो पा रहा है। स्वयं के भवनों में शिफ्ट हो चुके आंगनवाड़ी केंद्रों में विद्युत कनेक्शन की कवायद शुरू हुई है।

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1783 आंगनवाड़ी केंद्रों पर बिजली तक नहीं, किराए के भवनों में भी  समस्या

टीनशेड में संचालित बंद आंगनबाड़ी केंद्र।, टीनशेड में संचालित बंद आंगनबाड़ी केंद्र।, टीनशेड में संचालित बंद आंगनबाड़ी केंद्र।

रवींद्र सिंह कुशवाह, भिण्ड.
1783 भवनों में बिजली नहीं
जिले में महिला बाल विकास विभाग के अधीन 2451 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन होता है। 941 स्व-सहायता समूह इनके लिए पोषण आहार की व्यवस्था करते हैं। विभाग की ओर से किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। किराए के भवनों में संचालित होने वाले 668 आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता स्तर पर भवन किराए में में से ही बिजली का इंतजाम किया जाता है। ऐसे में शहरी क्षेत्र और कार्यकर्ताओं के स्वयं के भवनों में ही बिजली का इंतजाम हो पाता है।
800 भवन ही बने हैं विभागीय तौर पर
जिले में 800 के करीब ही महिला बाल विकास विभाग के आंगनबाड़ी केंद्र भवन बने हैं। 900 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र अन्य विभागों के सरकारी भवनों मेेंं संचालित हैं, लेकिन बिजली का इंतजाम यहां भी नहीं है। यही वजह है कि हितग्राही केंद्रों पर केवल उपस्थिति दर्ज कराने आते हैं, पढ़ाई एवं अन्य गतिविधियां संचालित नहीं हो पाती हैं। सोमवार को तीन आंगनवाड़ी केंद्र देखे, सभी किराए के भवनों और बंद मिले।
तीन माह में होगी बिजली की व्यवस्था
महिला बाल विकास विभाग का दावा है कि केंद्र सरकार ने विभागीय निर्मित भवन मेेंं संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए बिजली व्यवस्था को हरी झंडी दे दी है। इसमें ऐसे भवनों का चयन किया जाएगा जहां कोई खंभा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और केबल के माध्यम से बिजली आपूर्ति शुरू हो जाएगी। दूसरे चरण में ऐसे भवन लिए जाएंगे जहां एक-दो खंभे लगाकर बिजली आपूर्ति शुरू की जा सके। अन्य भवनों के लिए सरकार से कोई गाइड लाइन नहीं है।
दो हजार किराए में कैसे हो गुजारा
महिला बाल विकास विभाग किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए शहरी क्षेत्र में महज दो हजार रुपए किराया देता है। इसमें एक कमरा मुश्किल से मिल पाता है। ऐसे में बिजली का उपयोग करें तो 500 रुपए बिल आ जाएगा, इसलिए जहां स्वयं के मकान हैं, वहीं बिजली उपयोग हो पाती है। विभागीय तौर पर कुछ नहीं।
फैक्ट फाइल
2451 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिले में।
668 किराए के भवनों में हो रहे हैं संचालित।
800 से ज्यादा विभागीय भवन बन चुके हैं जिले में।
900 से ज्यादा केंद्र अन्य विभागों के सरकार भवनों में संचालित।
कथन-
वर्तमान में विभागीय तौर पर आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर बिजली कनेक्शन या बिल का कोई प्रावधान नहीं है। विभाग की ओर से निर्मित भवनों में उपलब्ध अधोसंरचना के आधार पर केवल कनेक्शन की कवायद शुरू की गई है। तीन माह में पूरी होने की उम्मीद है। दूसरे चरण में एक-दो खंभे की आवश्यकता वाले केंद्र लिए जाएंगे।
अब्दुल गफ्फार खान, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग, भिण्ड।