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प्रसव के लिए आई महिला को बाहर निकाला, खुले में डिलीवरी

चिकित्सा का मंदिर कहे जाने वाले जिला अस्पताल और भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों का अमानवीय चेहरा बुधवार को सामने आया। चिकित्सकों की उदासीनता और स्टॉफ नर्स का लालच पूरा न कर पाने पर एक महिला को प्रसूति वार्ड से बाहर भगा दिया गया और महिला ने खुले टीनशेड में जमीन पर एक बच्चे को जन्म दे दिया।

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महिला को बाहर निकाला, खुले में डिलीवरी-भिण्ड

अस्पताल में अमानवीयता की घटना बताती महिला की सास।

भिण्ड. लश्कर रोड पर पिड़ोरा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय राखी पत्नी बंटी परिहार को सुबह करीब चार बजे प्रसव वेदना हुई। 108 एंबुलेंस को कॉल किया और उसकी सास गुड्डीबाई व देवर कान्हा परिहार महिला को जिला अस्पताल लेकर आए। महिला की सास गुड्डी बाई ने बताया कि अस्पताल में स्टॉफ नर्स ने कहा कि ऑपरेशन होगा, इसके लिए मना किया तो नार्मल डिलीवरी के लिए पांच हजार रुपए मांगे। गुड्डीबाई ने बताया कि उसकी बहू की पहले दो डिलीवरी नॉर्मल हुईं, यह बात नर्स व अन्य स्टॉफ को बताया, लेकिन किसी ने सुना नहीं और घुमाते ही रहे, बाद में बाहर जाने को कह दिया। बाहर लाने पर खुले टीनशेड में दोपहर में करीब तीन बजे डिलीवरी हो गई। उसकी बहू ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। लेकिन खुले में डिलीवरी होने से बहू की तबीयत खराब हो गई।
कलेक्टर के निरीक्षण का कोई असर नहीं
तीन अगस्त से सात अक्टूबर के बीच कलेक्टर संजीव कुमार श्रीवास्तव जिला अस्पताल का चार बार निरीक्षण कर चुके हैं। आकस्मिक निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर को हर बार अव्यवस्थाएं मिलीं और वे सुधार के निर्देश देते रहे, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन को संज्ञान में जब यह मामला लाया गया तो सिविल सर्जन का औपचारिक बयान था कि महिला शिकायत कर दे, हम नर्सिंग स्टॉफ को सामने बुलवा लेंगे, वह पहचान ले तो जांच और कार्रवाई की जाएगी।
मौके पर नहीं मिली रुपए मांगने वाली नर्स
थोड़ी देर में सिविल सर्जन डॉ. अनिल गोयल वार्ड में पहुंचे। महिला से पूछताछ की तो महिला ने फिर अपने आरोप दोहराए। पहले ड्यूटी पर ही नर्सिंग स्टॉफ होने की बात कह रहे सिविल सर्जन बाद में स्टॉफ की शिफ्ट बदल जाने की बात कहने लगे और प्रसूति वार्ड के अंदर घुसकर दूसरे दरवाजे बाहर निकल गए। अस्पताल प्रबंधन की यह उदासीनता चिंता का विषय है।
कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, नर्स नहीं मिलीं
मामले की गंभीरता और अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता की खबर के बाद कलेक्टर संजीव कुमार श्रीवास्तव रात करीब आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचे। अपना सरकारी वाहन छोडकऱ कलेक्टर एक निजी वाहन से अस्पताल पहुंचे और पीडि़त महिला के परिजनों को खोजा। पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि उसे दो नर्सों ने रुपए मांगे थे। हालांकि मौके पर उनमें से एक भी नर्स नहीं मिली। सुबह उनकी पहचान कराई जाएगी, वहीं कलेक्टर ने सीएस को आड़े हाथ लिया और कहा कि यह स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कथन-
महिला अपने आरोपों के संबंध में आवेदन देदे, हम नर्सिंग स्टॉफ को बुलाकर पहचान करवा लेंगे, महिला जिन्हेंं पहचानेगी, उनके बयान लेकर जांच की जाएगी और आरोप प्रमाणित होने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अनिल गोयल, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल।
-जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में एक महिला की डिलीवरी के लिए पांच हजार रुपए मांगे जाने और न देने पर बाहर कर देने का मामला संज्ञान में लाया गया था। रात में अस्पताल पहुंचकर महिला की सास से बात की है, जिन नर्सों पर आरोप था, वे नहीं मिलीं, सुबह पहचान कराई जाएगी। यह स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी, कार्रवाई की जाएगी।
संजीव कुमार श्रीवास्तव, कलेक्टर, भिण्ड।

मौके पर नहीं मिली रुपए मांगने वाली नर्स
थोड़ी देर में सिविल सर्जन डॉ. अनिल गोयल वार्ड में पहुंचे। महिला से पूछताछ की तो महिला ने फिर अपने आरोप दोहराए। पहले ड्यूटी पर ही नर्सिंग स्टॉफ होने की बात कह रहे सिविल सर्जन बाद में स्टॉफ की शिफ्ट बदल जाने की बात कहने लगे और प्रसूति वार्ड के अंदर घुसकर दूसरे दरवाजे बाहर निकल गए। अस्पताल प्रबंधन की यह उदासीनता चिंता का विषय है।

मौके पर नहीं मिली रुपए मांगने वाली नर्स
थोड़ी देर में सिविल सर्जन डॉ. अनिल गोयल वार्ड में पहुंचे। महिला से पूछताछ की तो महिला ने फिर अपने आरोप दोहराए। पहले ड्यूटी पर ही नर्सिंग स्टॉफ होने की बात कह रहे सिविल सर्जन बाद में स्टॉफ की शिफ्ट बदल जाने की बात कहने लगे और प्रसूति वार्ड के अंदर घुसकर दूसरे दरवाजे बाहर निकल गए। अस्पताल प्रबंधन की यह उदासीनता चिंता का विषय है।