
कर्मचारी नहीं चला सके मशीन, लैब में जरूरी उपकरण भी नहीं मिले
भिवाड़ी. सेंट्रल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की 32 पर्यावरण प्रयोगशाला (लैब) की मान्यता को अस्थायी रूप रद्द कर दिया है, जिसमें भिवाड़ी में संचालित चार प्रयोगशाला भी शामिल हैं। नोटिस देकर सुधार के निर्देश दिए हैं, तब तक के लिए लैब की मान्यता को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। तब तक ये लैब जांच नहीं कर सकेंगी। सभी को जबाव देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। सीपीसीबी की इस कार्रवाई से हडक़ंप मचा हुआ है। फैक्ट्रियों को पर्यावरण मानकों का प्रमाणपत्र देने वाली लैब ही इस बार सीपीसीबी के रडार पर आ गई और जांच में असफल साबित हुई हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फैक्ट्रियों को जारी किए गए जल और वायु प्रदूषण का स्तर क्या रहा होगा। लैब की जांच के बाद सीपीसीबी के मेंबर सेक्रेट्री भारत कुमार शर्मा ने सभी को मान्यता रद्द करते हुए नोटिस जारी किए हैं। सीपीसीबी और आरपीसीबी समय-समय पर इंडस्ट्री से प्रदूषण मानकों की पालना करने संबंधी रिपोर्ट मांगती है। उस रिपोर्ट को उक्त लैब की ओर से किया जाता है। उक्त लैब की ओर से जल एवं वायु प्रदूषण की जांच की जाती है, उक्त जांच को संबंधित इकाई अपनी अनुपालना रिपोर्ट एवं ऑडिट में लगाते हैं।
विभाग के नाम पर बड़ा माहौल
प्रयोगशालाओं की ओर से फैक्ट्रियों के जल और वायु प्रदूषण सहित अन्य जांच के लिए क्षेत्र में बड़ा माहौल तैयार किया गया है। सीपीसीबी और आरपीसीबी का डर दिखाकर बहुत कम दर पर होने वाली जांच के भी बहुत अधिक फीस ली जाती है। अधिकांश फैक्टरी संचालकों को इस तरह की जांच और उसकी कितनी फीस लगेगी इसकी जानकारी ही नहीं होती। जबकि सीपीसीबी की जांच में क्षेत्र में संचालित लैब ही जुगाड़ से संचालित होती मिली।
क्षेत्र की लैब में ये मिली खामियां
एक लैब कर्मचारी से प्रदूषण मानकों की गणना करने के लिए कहा गया, वह प्रदूषण मानकों का परिणाम नहीं दे सका। दूसरी लैब में दो उपकरण चलते हुए नहीं मिले, कर्मचारी गणना नहीं कर सका। तीसरी लैब में कर्मचारी गणना नहीं कर सका, प्रदूषण मानकों को जांचने के लिए लैब में जरूरी मशीन एनालाइजर उपलब्ध नहीं था। जांच किट लीक टेस्ट में फेल हो गई। प्रदूषण की जांच हेतु आवश्यक गणना करने में कर्मचारी असमर्थ रहे। चौथी लैब में लैबोरेट्री की टीम तकनीकि रूप से दक्ष नहीं मिली। सैंपलिंग टीम की ओर से किए गए काम का रिकॉर्ड नहीं था। जांच किट लीक टेस्ट में फेल हो गई। जांच किट में नोजल का कैलिब्रेशन नहीं कराया था। इस तरह दूसरी कंपनियों और फैक्ट्रियों को प्रमाणपत्र देने वाली लैब खुद के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने, जरूरी उपकरण रखने और संचालन करने में नाकाम रही। इस प्रकरण के बाद यहां से जांच कराने वाले उद्यमियों को भी जागरुक होना होगा।
Updated on:
20 May 2026 07:02 pm
Published on:
20 May 2026 07:02 pm
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