
आवासन मंडल से सीवर शोधन के लिए 80 लाख, निजी बिल्डर को निशुल्क सुविधा
भिवाड़ी. बीडा ने आवासन मंडल के सेक्टर से आ रही सीवरेज के शोधन के बदले में विभाग से 80 लाख रुपए लिए। यह रूपए सीवरेज शोधन में एसटीपी के संचालन में हुए खर्चे के लिए गए। एसटीपी में बीडा और आवासन मंडल के सेक्टर के कनेक्शनों को अलग कर यह लागत निकाली गई। बीडा ने एक निजी बिल्डर की आवासीय सोसायटी से आ रहे सीवरेज का भी कई साल शोधन किया, लेकिन बिल्डर पर मेहरबानी की है। उसकी सीवरेज को निशुल्क शोधन किया है। यह मामला बीडा अधिकारी और अभियंता के संज्ञान में आने के बाद भी निजी सोसायटी संचालकों पर परोपकार किया गया है। निजी बिल्डर द्वारा अरावली विहार सेक्टर तीन में आवासन मंडल की लाइन से सीवर को जोड़ दिया। यह लाइन बीडा के वसुंधरा नगर स्थित एसटीपी पर आती है। इस लाइन से ही बिल्डर द्वारा बसाई गई कॉलोनी के ४०० भवनों का सीवरेज कई साल तक शोधित होता रहा। गत वर्ष दिसंबर में यह मामला बीडा अधिकारियों के संज्ञान में आया। मौके पर गए अभियंताओं ने मामले को रफादफा कर दिया। तब सोसायटी का एसटीपी चालू नहीं था। सोसायटी परिसर से सरकारी लाइन में सीवरेज को जोड़ रखा था। लेकिन बीडा अभियंताओं ने इस मामले को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इस मामले को लेकर न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही बिल्डर से कोई जुर्माना या शोधन का शुल्क वसूला गया। जबकि बीडा ने उक्त एसटीपी पर ही आवासन मंडल तक से शुल्क लिया। जबकि बीडा द्वारा सीवरेज के शोधन पर हर महीने पांच लाख रुपए व्यय किया जाता है। जबकि इसका निशुल्क उपयोग निजी बिल्डर्स द्वारा किया जा रहा है। कई अधिकारियों को भी अवैध रूप से बिछाई गई सीवरेज लाइन की जानकारी है लेकिन उन्होंने भी इसे उखाडऩे के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। अरावली विहार सेक्टर तीन स्थित राजश्री रॉयल रेजीडेंसी में करीब 400 मकान हैं।
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कई वर्ष से चल रही अवैध लाइन से अच्छी बचत
अगर इस मामले की सही प्रकार से जांच हो तो निजी बिल्डर से लाखों रूपए की वसूली हो सकती है। क्योंकि बीडा द्वारा एसटीपी के संचालन पर हर महीने लाखों रुपए खर्च किया जाता है। जबकि बिल्डर द्वारा 400 घरों की सीवरेज का उपयोग करने के लिए निशुल्क सेवा ली गई। तकनीकि जानकारों के अनुसार 400 घरों की सोसायटी के लिए 200 केएलडी क्षमता के एसटीपी की जरूरत होती है। इसके निर्माण में 25 लाख की लागत आएगी। साथ ही एक लाख रुपए महीना रखरखाव पर खर्च करना पड़ेगा। निजी बिल्डर द्वारा निर्माण लागत और हर महीने के रखरखाव को बचाकर मोटी बचत की गई है, जबकि सोसायटी की सीवर को कई वर्षों तक शोधित करने में बीडा द्वारा काफी राशि व्यय की गई है। इस तरह का मामला पकड़ में आने पर बीडा अगर सख्ती करती है तो काफी रिकवरी निकल सकती है। इसके साथ ही निजी सोसायटी द्वारा मुख्य गेट से करीब 100 मीटर दूर तक सडक़ के नीचे खुदाई कर लाइन बिछाई गई है। लाइन बिछाते समय संबंधित विभाग से अनुमति भी नहीं ली गई। अवैध रूप से लाइन बिछाई गई। इस मामले को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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इस मामले को दिखवा रहा हूं, संबंधित जेईएन को फाइल तैयार करने के लिए निर्देशित किया है।
धर्मेंद्र सोनी, एक्सईएन, बीडा
Published on:
11 Sept 2023 07:48 pm

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