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एकीकृत सफाई मॉडल में फेरबदल, सात की जगह पांच साल का लगेगा टेंडर

औद्योगिक नगरी में एक साल पूर्व शुरू हुई एकीकृत सफाई योजना (इंटीग्रटेड प्लान) अब नए सिरे से तैयार किया गया है। अब इसमें रीको और आवासन मंडल शमिल नहीं है। नगर परिषद के साथ सिर्फ बीडा का क्षेत्र रहेगा। संपूर्ण क्षेत्र में सफाई की जो योजना तैयार की गई थी, वह अब पहले की तरह ही सीमित क्षेत्र में रहेगी।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

May 22, 2026

bhiwadi

रीको और आवासन मंडल नहीं होंगे शामिल, नगर परिषद और बीडा क्षेत्र में होगी सफाई

भिवाड़ी. औद्योगिक नगरी में एक साल पूर्व शुरू हुई एकीकृत सफाई योजना (इंटीग्रटेड प्लान) अब नए सिरे से तैयार किया गया है। अब इसमें रीको और आवासन मंडल शमिल नहीं है। नगर परिषद के साथ सिर्फ बीडा का क्षेत्र रहेगा। संपूर्ण क्षेत्र में सफाई की जो योजना तैयार की गई थी, वह अब पहले की तरह ही सीमित क्षेत्र में रहेगी। बीडा क्षेत्र में नगर परिषद पहले भी सफाई करती थी। इसके साथ ही एकीकृत सफाई मॉडल में फेरबदल किया गया है।

सफाई मॉडल में ये किया बदलाव
पहले सात साल का टेंडर था, अब पांच साल का रहेगा। रीको, आवासन मंडल के बाहर होने के बाद मासिक खर्च सवा दो करोड़ रहेगा, पहले साढ़े तीन करोड़ मासिक के करीब था। सफाई व्यवस्था में बीडा और नगर परिषद का क्षेत्र रहेगा। कचरा संग्रहण और परिवहन प्रभावी तरीके से होगा सकेगा। एक ही एजेंसी के पास पांच साल की जिम्मेदारी होने से श्रमिक और मशीनरी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हो सकेंगे। दूसरे चरण में प्रोसिसिंग डिस्पोजल का कार्य रहेगा, जिसमें वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, बायो मेथिनेसन प्लांट संभावित है। शासन स्तर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, इसके बाद टेंडर लगेगा।

इसलिए जरूरत पड़ी
भिवाड़ी को गुरुग्राम की काउंटर मैग्नेट सिटी की सोच को साकार देने के लिए सफाई बड़ा मुद्दा है। इस क्रम में पांच साल का इंटीग्रेटेड सफाई प्लान तैयार किया गया। जिमसें सडक़ों की सफाई, कचरा संग्रहण से लेकर कचरा प्रथक्कीकरण और वेस्ट टू एनर्जी मॉडल पर काम होगा। एक टेंडर कचरा संग्रहण का होगा जिस पर प्रति वर्ष सफाई पर करीब 27 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जबकि वर्तमान में प्रति वर्ष करीब दस करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। पहली बार होगा जब भिवाड़ी की वास्तविक आबादी के अनुसार टेंडर लगेगा। पूर्व में लगे टेंडर में सफाई कर्मचारियों की संख्या हमेशा कम रही। संसाधन भी सीमित रहे। इस बार सफाई का बजट बढ़ रहा है, साथ ही पांच साल का दीर्घकालीन रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे भिवाड़ी की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अभी तक सफाई के टेंडर सवा लाख की आबादी के अनुसार होते थे, जबकि भिवाड़ी उद्योग क्षेत्र है यहां करीब सात लाख की आबादी रहती है। दिन-रात हर वक्त कचरा निकलता है। दूसरे चरण में कचरा निस्तारण का टेंडर होगा।

वेस्ट टू एनर्जी मॉडल होगा शुरू
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय निदेशक डॉ. प्रशांत गर्गव ने गत वर्ष 22 जनवरी को भिवाड़ी आए थे। उनकी अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में वेस्ट टू एनर्जी मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया था। कचरे से बिजली और कंपोस्ट उत्पादन कर, कचरा प्रबंधन का स्थायी समाधान, क्षेत्र को स्वच्छ और हरित बनाने की योजना तैयार की थी। बैठक से पूर्व निदेशक (एनसीएपी) के साथ विभिन्न कचरा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ ने भिवाड़ी क्षेत्र में स्थित डंपिंग यार्ड, रीको क्षेत्र तथा भिवाड़ी सिटी में ठोस कचरा प्रबंधन, कचरे के माध्यम से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन सहित विभिन्न संभावनाओं को देखा था।

विशेषज्ञ ने ये सुझाव दिए थे
विशेषज्ञ ने भिवाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कचरे का आंकलन कर निस्तारण के विभिन्न उपाय सुझाए। उन्होंने कचरे प्रथक्कीकरण सहित कचरे के संग्रहण के लिए ऑटो टिपर की संख्या का आंकलन कर, अतिरिक्त ऑटो टिपर लगाकर कचरा इक_ा करने, भिवाड़ी क्षेत्र को विभिन्न क्लस्टरों में विभाजित कर कचरा प्रबंध करने, ऑटो टिपर की ट्रिप संख्या बढ़ाकर, रात के समय बाजार की सफाई और बाजार की छुट्टी के दिन सफाई का विशेष अभियान का सुझाव दिया था।