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’सरकार कर रही लघु उद्योगों को प्रोत्साहन, फिर भी स्थापित करना नहीं आसान’

उद्योगों के लिए प्राप्त ऋण के नियम किए सरल, लेकिन विभाग को आवंटित लक्ष्य पूरा करने में छूट रहे पसीने मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना

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मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना

भिवाड़ी. जिला उद्योग केंद्र भिवाड़ी।

भिवाड़ी. सरकार की ओर से एक ही तीर से सरकारी नौकरी पाने की कतार में खड़े युवाओं का ध्यान बांटने, निजी सेक्टर व स्वरोजगार को बढ़ावा देने सहित सादे जा रहे कई निशाने कारगार होते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसा इसलिए प्रतीत हो रहा है कि राजस्थान राज्य के राजस्व की मुख्य रीढ औद्योगिक नगरी भिवाड़ी क्षेत्र में ‘मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना’ को लेकर ऐसा ही देखने को मिल रहा है। जिसमें सरकार की ओर से आवंटित लक्ष्य पूरा करने के लिए संबंधित विभाग को आवेदनकर्ताओं की ओर ताकना पड़ रहा है।


सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने 17 दिसंबर 2019 को उक्त योजना शुरू की थी। जिसमें ऋण की तीन श्रेणियां भी बनाई गई है। पहली श्रेणी में 25 लाख तक के ऋण पर 8 प्रतिशत, दूसरी श्रेणी में 25 लाख से पांच करोड़ रुपए तक के ऋण पर 6 प्रतिशत और तीसरी श्रेणी में पांच करोड़ से 10 करोड़ रुपए तक के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देय है। योजना के तहत लघु उद्योग लगाने, इनका विस्तार करने, विविधीकरण और आधुनिकीकरण लाने के लिए राज्य सरकार की ओर से ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। कोई भी 18 वर्ष से अधिक आयु के युवा, संस्थागत आवेदक, सोसायटी और कंपनी आदि योजना के तहत ब्याज अनुदान ऋण पर प्राप्त कर सकते हैं। ब्याज अनुदान वाला ऋण प्राप्त करने के लिए एमएलयूपीवाई की साइट पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में डीआईसी की ओर से ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत कर बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं को भेज दिया जाता है।

फिर भी कर रहे इंतजार...
मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (एमएलयूपीवाई) के तहत 10 लाख तक का ब्याज अनुदान प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया काफी सरल करने के बावजूद जिला उद्योग केंद्र को आवेदन प्राप्त नहीं हो रहे। उद्योग शुरू करने के लिए 10 लाख तक डीआईसी की ओर से 160 आवेदनों को स्वीकृत करने का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक सिर्फ 35 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। जिन्हें विभाग की ओर से स्वीकृति के लिए बैंकों को भेज भी दिया है। विभाग का उद्देश्य है कि छोटे उद्यमियों को नया रोजगार शुरू करने के लिए 10 लाख तक के ब्याज अनुदान वाले ज्यादा से ज्यादा ऋण दिए जाएं, लेकिन इनकी संख्या कम रहने से विभाग को तय लक्ष्य प्राप्त करने में काफी दिक्कत आ रही है। योजना के तहत अभी तक डीआईसी के पास 658 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदकों में नया उद्योग लगाने और विस्तार से लेकर अन्य कार्यों के लिए 67 हजार 733 लाख रुपए की मांग की गई है। जिसमें से 283 आवेदन स्वीकृत हुए हैं और उन्हें विभिन्न बैंकों के माध्यम से 16062 लाख रुपए के ऋण जारी किए गए है।

आवेदन व स्वीकृति की यह है स्थिति
डीआईसी ने चालू वित्तीय वर्ष में पांच से 10 करोड़ के लिए दो उद्यमियों को ऋण स्वीकृत करना है। जिसमें दो आवेदन आ भी गए। जिसमें एक को ऋण स्वीकृत हो चुका है, वहीं दूसरा आवेदन लंबित चल रहा है। इसके अलावा 25 लाख रुपए से 5 करोड़ रुपए तक डीआईसी को 18 उद्यमियों को ऋण स्वीकृत करने हंै। जिसमें से पांच को स्वीकृत हो चुके हैं और 13 के लंबित चल रहे हैं। इसी तरह 25 लाख रुपए तक 160 उद्यमियों को ऋण स्वीकृत करने हैं। जिसमें से 20 को स्वीकृत हो चुके हैं और 54 के लंबित हैं। डीआईसी के पास जितने आवेदन आए हैं, उनकी फाइल वित्तीय संस्थानों को भेजी जा चुकी हैं। अब उन्हीं के स्तर पर 68 ऋण स्वीकृति लंबित है। सरकार की ओर से 10 लाख तक के ऋण आवेदन के लिए नियमों को सरल बनाया गया है, अगर यहां आवेदकों की संख्या तय लक्ष्य तक पहुंचती है तो इस संख्या में जरूरत के अनुसार बढ़ोत्तरी भी की जा सकती है। इधर डीआईसी जीएम डॉ. रंजना का कहना है कि राज्य सरकार की योजना है कि छोटे उद्यमियों को नए रोजगार लगाने के लिए ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाएं। 10 लाख तक के ऋण प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रक्रिया भी काफी सरल की है, लेकिन विभाग को इसके लिए आवेदन प्राप्त नहीं हो रहे हैं।