
करीब एक फीसदी अतिरिक्त खर्च, देशभर में महंगा हुआ राजस्थान उद्यमी सरकार से फैसले को लेकर कर रहे पुनर्विचार की मांग
भिवाड़ी. प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में लागू किए गए एक नए प्रावधान ने औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर भिवाड़ी के एमएसएमई उद्यमियों पर वित्तीय भार बढ़ाकर असंतोष पैदा कर दिया है। अब बैंकों से (ऋण) लोन लेने के बाद उद्यमियों को मॉर्गेज डीड (बंधक पत्र) का पंजीयन कराने के लिए अलग से तहसील, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाना अनिवार्य कर दिया गया है। उद्यमियों का कहना है कि इस नई प्रक्रिया से ऋण लागत में करीब एक प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि हो रही है, जो पहले से ही उच्च ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ा झटका है। भिवाड़ी के उद्योग संगठनों ने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने की तैयारी शुरू कर दी है और जल्द ही जयपुर स्तर पर ज्ञापन सौंपा जाएगा। उद्यमियों की मांग है कि मॉर्गेज डीड रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता खत्म की जाए, सिर्फ नाममात्र शुल्क रखा जाए, खासकर कोलेटरल ट्रांसफर मामलों में, प्रक्रिया को बैंक के माध्यम से डिजिटल किया जाए और एनसीआर के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं। उद्योग जगत का मानना है कि यदि इस फैसले पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर निवेश और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा
सिर्फ गिरवी ट्रांसफर, मालिकाना हक नहीं बदलता
उद्यमी विरल गर्ग का कहना है कि ज्यादातर मामलों में यह केवल बैंक के बीच कोलेटरल ट्रांसफर होता है, जिसमें संपत्ति का मालिकाना हक नहीं बदलता। इसके बावजूद पूर्ण रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूलना तर्कसंगत नहीं है।
सरकार की नीतियों में विरोधाभास
हाल ही में सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए फोरक्लोजर शुल्क खत्म किए थे, ताकि उद्यमी आसानी से बैंक बदल सकें और प्रतिस्पर्धी ब्याज दर का लाभ उठा सकें। अब हर बार लोन ट्रांसफर पर नया रजिस्ट्रेशन खर्च लगने से जो राहत दी गई थी, उसका भी कोई मतलब नहीं रहेगा। एमएसएमई उद्योग बैंक बदलने में हिचकिचाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से उद्यमी आसानी से बैंक नहीं बदल पाएंगे, जिससे बैंकों की मोलभाव करने की शक्ति बढ़ेगी और ब्याज दरें कम करने का दबाव घटेगा। इसका सीधा असर उद्योगों की पंूजी लागत पर पड़ेगा।
पहले से मौजूद है सीईआरएसएआई व्यवस्था
बैंक पहले ही सीईआरएसएआई के माध्यम से संपत्ति पर शुल्क लेते हैं , जिससे ऋण पूरी तरह सुरक्षित रहता है। ऐसे में अलग से ऋण पंजीयन को अनावश्यक दोहराव माना जा रहा है।
एनसीआर में अलग, राजस्थान में अलग नियम
भिवाड़ी एनसीआर का हिस्सा है, यहां के उद्यमियों का कहना है कि दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में ऐसी जटिल प्रक्रिया नहीं है। इससे राजस्थान निवेश के लिए कम प्रतिस्पर्धी बनता जा रहा है।
सीजीटीएमएसई योजना पर भी सवाल
सरकार एक तरफ 10 करोड़ तक बिना गारंटी ऋण देने की योजना (सीजीटीएमएसई) चला रही है, वहीं जमीनी स्तर पर बैंक अभी भी संपत्ति गिरवी रखने पर जोर दे रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि पहले इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
ये नए प्रावधान
पहले ऋण लेने पर ऋण दस्तावेज का पंजीयन अनिवार्य नहीं था। ऐच्छिक पंजीयन कराने पर 0.25 फीसदी स्टांप ड्यूटी और अधिकतम 15 लाख रुपए चार्ज लग सकता था। अब नए प्रावधान में दो दिसंबर 2025 से ऋण दस्तावेज का पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया है। पंजीयन शुल्क 0.5 फीसदी है। अधिकतम एक लाख रुपए शुल्क लगेगा। ये शुल्क सामान्य इकाइयों के लिए है। जबकि एमएमएसई इकाइयों के लिए स्टांप ड्यूटी 0.125 फीसदी है और अधिकतम दस लाख रुपए शुल्क है। पूर्व में एमएसएमई इकाइयों के लिए मुद्रांक कर सिर्फ पांच सौ रुपए था।
Published on:
23 Mar 2026 06:17 pm
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