राजगढ़ (अलवर) . कस्बे के गंगाबाग में चल रहे भगवान जगन्नाथजी के मेले अवसर पर शुक्रवार को ठिकाना गंगाबाग के महंत प्रकाशदास गाजे-बाजे, श्रद्धालुओं, साधु-संतों सहित गंगाबाग स्थित जगन्नाथ दरबार पहुंचे। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना व भगवान के श्रीचरणों में भेंट न्यौछावर करते हुए वधू पक्ष के महंत प्रकाशदाश ने वर पक्ष के महंत पूरणदास को 24 जून को दोपहर भगवान जगन्नाथजी व बारातियों को सहित स्नेह भोज के लिए आमंत्रण दिया। इससे पूर्व वर पक्ष के महन्त पूरणदास, मदनमोहन शास्त्री, मेला कमेटी अध्यक्ष महेन्द्र प्रसाद तिवाडी़ ने माला दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान बडी संख्या में लोग मौजूद रहे।
परिणय सूत्र में बंधेंगे आज
भगवान जगन्नाथजी का आषाढ़ शुक्ला षष्ठी की शाम आठ बजे गंगाबाग स्थित मंदिर पर वरमाला महोत्सव होगा। इसी के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान जगन्नाथ एवं माता जानकी परिणय सूत्र में बंध जाएंगे। इस मौके पर श्रद्धालु इस अलौकिक परिणय के साक्षी बनेंगे। इस बार वरमाला महोत्सव आकर्षण का केन्द्र रहेगा। भगवान जगन्नाथजी को माता जानकी जयपुर के मोगरे की 14 फीट की वरमाला पहनाएगी।
भराभर का मेला
जगन्नाथजी की रथयात्रा के गंगाबाग पहुंचने के तीसरेे दिन दूल्हे बने जगन्नाथजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने सुबह गंगाबाग पहुंचकर परिक्रमा कर भगवान जगन्नाथजी से मनोत्तियां मांगी। शाम मेला देखने के लिए भीड उमड़ पड़ी। मेले में व्यंजनों का लुत्फ उठाया। महिलाओं ने सामान तथा बच्चों ने खिलौनो की खरीदारी की।
रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालु
मालाखेड़ा. भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा मालाखेड़ा जगदीशजी मंदिर से महाआरती, पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई। शुक्रवार सुबह 7:15 बजे मंदिर में महाआरती की गई। पूजा अर्चना कर भगवान जगन्नाथजी को रथ में विराजमान कराया।
इस अवसर पर महंत रामअवतार दीक्षित सहित सर्वसमाज के लोगों ने महाआरती में भाग लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं जगन्नाथजी के दर्शन करने के लिए आतुर रही। श्रद्धा के अनुसार उन्होंने भगवान के भेंट अर्पित की। नौनिहालों को बाबा के दर्शन कराएं। रंग-बिरंगी रोशनी दोनों और चल रही थी। बैंड बाजे, झांकी रथयात्रा में शोभायमान थी। कस्बे में विभिन्न स्थानों पर मीठे जल की प्याऊ व शरबत की स्टाल लगाई गई। रथयात्रा तुलसीरामजी की बगीची के लिए रवाना हुई। पुजारी ने बताया शनिवार को वर पक्ष का स्वागत व भोजन होगा। 25 को मेला, रात्रि को वरमाला महोत्सव तथा 26 को भगवान जगन्नाथ-जानकीजी को ब्याह कर वापस अपने गर्भ ग्रह के लिए रवाना होंगे। भीषण गर्मी और 23 धूप में भी श्रद्धालुओं ने जगदीशजी के मंदिर से तुलसीरामजी की बगीची तक दंडोती देकर सुख-समृद्धि की कामना की।