
vinesh wrestler
भिवानी। जब विनेश छोटी थी तो मिट्टी के घर बनाकर खेलती थी उसके बाद मिट्टी में खेलते खेलते विनेश ने कुश्ती के गुर ऐसे सीखे कि अब उसने ओलपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया। रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की खुशी परिजनों को जरूर है लेकिन गीता व बबीता का ओलंपिक में क्वालीफाई नहीं कर पाने का मलाल भी है। लेकिन इसके बाबजूद गांव बलाली में एक उम्मीद की किरण जरूर जगी है।
विनेश फौगाट ने 48 किलोग्राम महिला वर्ग में रियो के लिए क्वालीफाई किया है। पांच अगस्त से 21 अगस्त तक होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला कुशती पहलवान हैं। चार साल पहले 2012 के लंदन ओलिंपिक में सिर्फ गीता फोगाट (55 किग्रा) ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। विनेश के लिए रियो ओलिंपिक का सफर काफी मुश्किलों , विवादों और चुनौती से भरा रहा है। उन्हें कजाखिस्तान के अस्ताना में हुए पिछले विश्व क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में 400 ग्राम वजन अधिक होने के कारण अयोग्य करार दिया गया था जिसके कारण वह अस्ताना में मुकाबलों में नहीं उतर सकी थीं।
महावीर कोच ने बताया कि विनेश ने अपनी बहनों गीता, बबीता रितु के साथ घर के अखाड़े में ही कुश्ती के दांवपेच सीखे है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स समेत नेशनल, इंटरनेशनल प्रतियोगिता में कई मेडल जीते। विनेश के ताऊ महाबीर फौगाट का कहना है कि वैसे तो मुझे तीनों बेटियों के ओलंपिक में जाने की उम्मीद थी, लेकिन मंगोलिया में कांस्य के लिए मुकाबले में खेलकर गीता, बबीता ने गलती कर दी, जिससे वे अयोग्य करार दे दी गईं, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि विनेश मेडल जीतकर हमारे सपनों को पूरा करेगी।
विनेश की मां दयाकौर ने कहा कि वे अपनी बेटी विनेश की कामयाबी से बहुत खुश हैं। लेकिन इस बात का भी दुख है कि गीता व बबीता क्वालीफाई नहीं कर पाई। अब सिर्फ विनेश पर ही उनकी आस टिकी है कि वह ओलंपिक में गोल्ड मेडल जरूर जीतकर लाएगी। इससे ज्यादा ओर गर्व की बात क्या होगी मेरे लिए। उनकी बेटियों ने कभी उनको बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। आगे भी उनकी बेटियां पदक लाकर देश क्षेत्र का नाम रोशन करेगी।
विनेश की छोटी बहन रीतू फौगाट ने कहा कि उनको पूरी उम्मीद थी कि विनेश रीओ ओलपिंक में जरूर क्वालिफाइ करेगी और ओलपिक में भी सोना जीतकर अपने देश का नाम रोशन करेगी।
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