
भोपाल@गौरव मिश्रा
हमेशा से शिकायतों में बने रहने वाला मिड डे मील कोरोना के पश्चात एक बार फिर शुरु होने के साथ ही सवालों के घेरे में आ गया है। दरअसल राज्य में स्कूल खुले एक महीना बीत गया है, लेकिन समस्याओं का अंबार पिछले कुछ वषों जैसा ही है। शा. शाला दीपड़ी की पड़ताल में पाया कि मिड डे मील में बच्चों को परोसी गई सब्जी में आलू कम और पानी ज्यादा है। पानी की टंकी को कचरा घर बना रखा है।
स्कूल में नियमित रूप से उपयोग में आने वाले बाथरूम में ताला लगा है। छात्रों का कहना है कि अभी हम खुले में बाथरूम के लिए जाते हैं जबकि स्कूल की शाला प्रभारी सीमा विजवे ने बताया कि बाथरूम चालू है लेकिन इनमें ताला लगा है, क्योंकि बाहर से आने वाले लोग इसका उपयोग करने लगते हैं।
स्कूल में उगी घास, सांप, बिच्छू का डर
स्कूल के पिछले वाले भाग में घास इतनी बढ़ चुकी है कि यहां छात्रों की सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। समय समय पर इसकी देखरख और कटाई पर ध्यान नहीं दिया गया है। बरसात में यहां सांप भी निकलते हैं। स्कूल खुले तकरीबन एक माह होने को है फिर भी अभी तक सफाई नहीं करवाई गई है।
ड्रेस नहीं मिली, स्पोट्स का सामान क्लास रूम में पड़ा
स्कूल में जरूरी संसाधनों में ड्रेस और किताबें नहीं हैं। पुराने दाखिले वाले छात्रों के पास भले ही ड्रेस थीं लेकिन वो एक साल पुरानी और छोटी हो चुकी हैं। अमूमन जून के अंतिम सप्ताह तक इसको बांट दिया जाता है लेकिन चुनावी ड्यूटी और अधिकारियों की व्यस्तता से इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इस स्कूल में 60 बच्चे पढ़ते हैं बच्चों के स्पोट्स ग्राउंड का सामान क्लास रूम में रखा है। क्योंकि यहां खेलने को मैदान नहीं है।
अंग्रेजी के लिए अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल
शाला की प्रभारी सीमा विजवे कहती हैं कि हमारे यहां कक्षा 6 से 8 में 29 बच्चे है लेकिन दो ही अध्यापकों का स्टाफ है। उन्होंने बताया वो खुद अकेले ही 9 विषय पढ़ाती हैं बिगत तीन साल से अतिथि शिक्षक नहीं है। इस साल हमने इसके लिए शासन को जानकारी दी है। हमारे पास इंग्लिश शिक्षक की जगह भी खाली है। ऐसे में सवाल उठता कि गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की बात करने वाले दावे खोखले है जबकि स्कूल, स्टाफ की समस्या से जूझ रहे हैं।
गांवों में मिड डे मील की जिम्मेदारी जिला पंचायत की होती है लेकिन ये समस्या मेरे संज्ञान में आई है तो मैं इसको देखने के बाद जांच कराता हूं। इसके अलावा बाथरुम में बरसात में कीड़े मकोड़े ना घुसे और झाड़ ना उगे इसके लिए ताले लगाए गए हैं। हम इसके लिए कीटनाशक का छिड़काव भी करवाते है। हम इसकी जानकारी मंगवाने के बाद •ारूरी कदम उठाएंगे, अगर छिड़काव करवाना होगा या मरम्मत करवानी होगी, हम करवाएंगे।
- नितिन सक्सेना, जिला शिक्षा अधिकारी
Published on:
14 Jul 2022 02:55 pm
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