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चटखारे लेकर ‘फुल्की’ खाने वाले सावधान ! तीखे पानी के लिए ‘एसिड’ और ‘खराब आलू’ कर रहे यूज

फुल्की के 1200 स्टॉल बेच रहे बीमारियां, खाद्य अमला बेखबर......

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भोपाल। स्वाद के लिए फुल्की खाने वाले सजग हो जाएं। चटखारे के लिए जिस फुल्की को खा रहे हैं, वह सेहत के लिए असुरक्षित है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी शहर में खुलेआम बिकने वाली पानी-पूरी और फुल्की के स्टॉल पर सजी खाद्य सामग्री का लंबे समय से कोई सैंपल नहीं लिया है। फुल्की ठेलों की संख्या कोरोना काल के बाद शहर में डबल हो गई है। करीब 1200 फुल्की ठेले 12 से 15 हजार लोगों को रोज अमानक तरीके से फुल्की खिलाते हैं।

रिपोर्ट में मिली थीं खामियां

खाद्य सुरक्षा विभाग ने न्यू मार्केट, दस नंबर, पांच नंबर, नर्मदापुरम रोड, रायसेन रोड, पुराने शहर में कई स्थानो पर रेंडमली जांच करते हुए फुल्की के सैंपल लिए थे। जिसमें आधे से ज्यादा सैंपल फेल हुए थे। किसी ने पानी को तीखा करने के लिए एसिड मिलाया था, किसी के आलू खराब निकले थे। किसी के यहां खराब नमकीन मिला था। और भी कई तरह की खामियां रिपोर्ट में मिलीं थीं। इन्हें खाकर लोग बीमार हो रहे थे। यह स्थिति बरकरार है।

स्कूल, कॉलेजों के पास दिन भर रहती है भीड़

फुल्की का जायका लेने में स्कूली छात्राएं आगे रहती हैं। इस कारण नूतन कॉलेज के बाहर दिन भर कई फुल्की ठेले वाले खड़े रहते हैं। एमएलबी कॉलेज के पास तो इन फुल्की वालों में विवाद तक हो जाते हैं। गीतांजलि कॉलेज, डीआइजी बंगले, इनके बाहर तो दिन भर फुल्की ठेले खड़े रहते हैं। रश्मि राणा, स्टूडेंट्स, एमसीयू का कहना है कि पानीपुरी हर गली नुक्कड़ पर मिल जाते हैं। हर जगह ये साफ-सफाई मिलें, मुमकिन नहीं है। जिम्मेदारों को इस पर ध्यान देना चाहिए।

जलजीरा के सैंपल लिए

गर्मी बढ़ते ही खाद्य सुरक्षा अमले ने लिंक रोड नंबर एक पर खड़े होने वाले जलजीरा सेंटर पर जांच करते हुए दस सैंपल लिए हैं। इन दिनों जलजीरा सेंटर की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। कई बार ये भी फ्लैवर देने के लिए मिलावट करते हैं। देवेंद्र दुबे, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भोपाल का कहना है कि फुल्की स्टॉल की संख्या पहले से काफी बढ़ गई है। काफी संख्या में लोग इनका स्वाद भी लेते हैं। हम इनकी सैंपलिंग कराएंगे।

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