
अयप्पा मंदिर भेल में अट्टुकल पोंगाला का आयोजन,
भोपाल. अयप्पा मंदिर भेल परिसर में रविवार को नजारा कुछ अलग था। यहां परिसर में ईट से लगभग 200 चूल्हे बनाए गए थे और महिलाएं यहां खीर तैयार कर रही थी। केले के पत्ते पर विभिन्न सामग्री रखी थी। मंदिर के पंडित विधि विधान के साथ पूजन करवा रहे थे और श्रद्धा, भक्ति का नजारा दिखाई दे रहा था।
तिरुवनंतपुरम,केरल के अटुकल मंदिर की तरह भेल के अयप्पा मंदिर में भी रविवार को अट्टुकल पोंगाला का आयोजन किया गया। इस दौरान मां भगवती की पूजा अर्चना की गई। अयप्पा मंदिर भेल के निदिश नायर ने बताया कि पोंगाला का अर्थ है उबालना। इस अनुष्ठान में महिलाएं चावल, गुड़, केला आदि वस्तुओं को चूल्हे पर पकाकर खीर तैयार करती है और मां भगवती को अर्पित करती है। माना जाता है कि इस अनुष्ठान से देवी को प्रसन्न किया जाता है, जिन्हे अट्टुकलम्मा कहा जाता है। मलयालम कैलेंडर के हिसाब से कुंभ माह में इसे मनाया जाता है, जो अभी चल रहा है।
मंदिर में हुई विशेष पूजा अर्चना
इस मौके पर अयप्पा मंदिर भेल में विशेष पूजा अर्चना की गई। मंदिर में आकर्षक साज सज्जा की गई। इसके बाद विधिवत पूजा अर्चना के साथ परिसर में महिलाओं ने चूल्हे जलाकर खीर बनाई। इसके बाद इस खीर का भोग मां भगवती को लगाया गया। इसके बाद मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
हर साल होता है यह आयोजन
मंदिर कमेटी के निदिश नायर का कहना है कि अट्टुकल केरल का प्रसिद्ध मंदिर है, जो शबरीमाला की तरह है। यहां हर साल हर साल कुंभ माह में यह आयोजन किया जाता है। अट्टकल पोंगाला दुनिया के किसी त्योहार के लिए महिलाओं की सबसे बड़ी मंडली है। इसे गिनीज वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस में भी दर्ज किया गया है। यह अनुष्ठान महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। इसमें महिलाएं खीर उबालती है और भोग लगाती है। इसी के तहत यह आयोजन किया गया। जिसमें करीबन 200 महिला भक्तों ने भाग लिया।
Published on:
25 Feb 2024 10:42 pm
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