भोपाल

2352 करोड़ खर्च, 7 साल में एक भी नहीं बनी स्मार्ट सिटी

सातों शहरों के लिए 2392 करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने जारी किए थे    

3 min read
Sep 27, 2022
2392 करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने जारी किए


भोपाल. प्रदेश के सात शहरों को स्मार्ट सिटी में बदलने का सपना सात साल बाद भी साकार नहीं हो पाया है। वजह, औसतन 38 प्रतिशत परियोजनाएं अब तक पूरी नहीं हुईं। हालात ये हैं कि इनमें से 3 प्रतिशत परियोजनाओं की निविदा जारी हुई है या जारी करने की तैयारी है। भोपाल, इंदौर जबलपुर ग्वालियर सागर सतना और उज्जैन में स्मार्ट सिटी का काम साल 2015 में शुरू हुआ था। पूरा 2023 में करना है। अब इसके दस माह में पूरा होना मुश्किल लग रहा है। भोपाल में तीन परियोजनाओं के लिए 2313 करोड़ की निविदाएं हाल ही में जारी की गई हैं। ग्वालियर में 350 करोड़ के टेंडर जारी हुए हैं।

इंदौर सबसे आगे
स्मार्ट सिटी की शक्ल देने में इंदौर सबसे आगे है। कुल मंजूर 263 परियोजनाओं में से 218 पूरी हैं। इन पर 6537.36 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। बाकी के करीब 240 करोड़ के काम और होने हैं। हालांकि 17 परियोजनाओं के लिए टेंडर फाइनल नहीं हुए हैं। लागत 250 करोड़ से कम है।

उज्जैन की स्थिति खराब
उज्जैन को स्मार्ट बनाने 102 विकास कार्यों को केंद्र ने मंजूरी थी दी। अभी तक सिर्फ 38 काम ही पूरे हो पाए हैं। हालांकि 90 फीसदी परियोजनाओं के लिए निविदा जारी कर दी गई हैं। इसके बाद सतना स्मार्ट सिटी के 81 में से 29 काम ही पूरे हो पाए हैं।

नेक्टर झील-चार साल बाद भी सपना अधूरा
सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 27.74 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही नेक्टर झील का निर्माण कार्य चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। अब तक महज 78 प्रतिशत काम हुआ है। झील के सरोवर का निर्माण 30 मई तक पूरा करना था जबकि संपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी एक साल का समय लगेगा।

कन्वेंशन सेंटर का काम अटका
जबलपुर के ओमती क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत 35 करोड़ की लागत से कन्वेन्शन सेंटर बन रहा है। इसे दिसंबर 2021 में पूरा होना था लेकिन कोरोना काल के कारण प्रोजेक्ट को एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया। अभी यहां सिविल स्ट्रक्चर का काम जारी है। काम पूरा होने पर कन्वेन्शन सेंटर में राष्ट्रीय.अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन हो सकेंगे।

समय सीमा निकली, फिर भी कार्य अधूरा
ग्वालियर में 300 करोड़ की लागत से थीम रोड बनाई जा रही है। इसकी समय सीमा खत्म हो चुकी है। दो महीने निकलने के बाद भी कार्य पूरा होता नहीं दिख रहा।

इंदौर में साढ़े पांच साल में भी नहीं लौटा राजबाड़ा का वैभव
इंदौर में साढ़े पांच साल से ज्यादा समय में भी राजबाड़ा का वैभव नहीं लौट पाया है। काम 2017.18 में शुरू हुआ। करीब 17.22 करोड़ से ऐतिहासिक स्वरूप लौटाने का दावा किया गया। समय सीमा दो साल रखी गई थी लेकिन काम धीमी गति से चलता रहा। कई बार समय सीमा बढ़ाई गई। अब अधिकारियों का दावा है कि काम लगभग पूरा हो चुका है। फिनिशिंग बची है।

भोपाल में बर्बाद हो गया मैदान
भोपाल स्मार्ट सिटी का एरिया बेस्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पूरा ही नहीं हो पा रहा। सात साल बाद भी स्थिति यह है कि टीटी नगर का दशहरा मैदान दो मंजिला अंडर ग्राउंड पार्किंग के लिए खोदा गया थाए वह भी पूरा नहीं हो पाया। इस बार भी दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं हो पाएगा। यह काम ठप पड़ा है। अंडर ग्राउंड पार्किंग में पानी जमा हो गया है। ऐसे में इस मैदान की बेहतरी का काम इसकी दुर्दशा का सबब बन गया है।

नगरीय प्रशासन विभाग के सेवानिवृत्त ईएनसी प्रभाकांत कटारे के अनुसार
प्रोेजेक्ट्स पर प्रभावी नियंत्रण और समय.समय पर रिवीजन नहीं होने से काम पिछड़ते हैं। स्मार्ट सिटी के कार्यों के लिए अनुभवी अमले की भी कमी है। इसके चलते कई काम पिछड़ गए हैं।

Published on:
27 Sept 2022 12:37 pm
Also Read
View All

अगली खबर