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गिद्ध स्टेट मध्यप्रदेश में गजब कारनामा, गिद्ध प्रजनन के नाम पर खर्च किए 3 करोड़, हर बच्चे पर 30 लाख खर्चे

वन विभाग ने मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले 8 साल में करीब तीन करोड़ रुपए खर्च किए। जानकर हैरानी होगी कि इन 8 सालों में महज 10 गिद्ध ही बढ़ पाए यानी एक गिद्ध के प्रजनन और बढ़ा करने पर करीब 30 लाख रुपए खर्च हुए।

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भोपाल। वन विभाग की शुरुआती योजना 2019 में गिद्ध को छोड़ने की थी, लेकिन जब सफलता नहीं मिल पाई तो इसे 2024 तक आगे बढ़ा दिया गया। यानी करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी विभाग अब तक एक भी गिद्ध को आजाद नहीं कर पाया, जबकि गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्रों का उद्देश्य न केवल गिद्धों की देखभाल व उनका संरक्षण करना है बल्कि उन्हें जंगली क्षेत्रों में छोड़ना भी है।
वन विभाग ने 2014 में केरवा में गिद्ध प्रजनन केंद्र शुरू किया था। तामिया से 6 गिद्ध लाए गए। इसी साल कुल 21 गिद्ध आए। इसके बाद 2016 में 10 और 19 गिद्ध यहां लाए गए। यहां 19 व्हाइट-बैक्ड और 41 लॉन्ग बिल्ड लाए गए। अधिकारियों के अनुसार जब ये गिद्ध यहां आए थे, इनकी उम्र 2 साल से कम थी। इनके 21 अंडों में से 10 से ही बच्चे जन्म ले पाए। अधिकारियां का कहना है कि 11 अंडे सक्सेस नहीं हो पाए।

इस साल 12 अंडे दिए
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के रोहन श्रृंगारपुरे के अनुसार गिद्ध प्रजनन केंद्र में पिछले साल 6 बच्चे हुए तो इस साल अब तक 12 अंडे दिए। इनका प्रजनन अक्टूबर से मई तक होता है। इसलिए इनकी संख्या ओर बढ़ सकती है। गिद्ध साल में एक ही अंडा देता है। 55 दिन में बच्चा अंडे से बाहर आता है। अब इनकी संख्या बढ़ाने के लिए इंक्यूबेशन सेंटर शुरू किया गया है। यहां आर्टिफिशियल तरीके से अंडों को सेने का काम किया जाएगा। इसकी टेस्टिंग भी हो चुकी है।

अब पिंजोर से लाए जाएंगे 20 जोड़े गिद्ध
अब वन विभाग गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए हरियाणा के पिंजोर गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र से 20 जोड़े गिद्ध ओर लाएगी। हरियाणा वन विभाग और सेंट्रल जू अथॉरिटी से अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। 2004 में शुरू हुए इस सेंटर में 400 गिद्ध हैं। केंद्र का इस वित्तीय वर्ष बजट 57.20 लाख रुपए है। अब तक करीब 40 लाख रुपए मिल चुके हैं। विभाग का दावा है कि 2024 तक 10 से 12 गिद्ध जंगल में छोड़ दिए जाएंगे। गिद्ध एक्सपट्र्स का कहना है यहां उन्हें सिर्फ गोट मिट ही दिया जाता था, जबकि जंगल में वे जंगली जानवरों का मांस खाते हैं। ऐसे में इनकी डाइट में बदलाव किया जाना चाहिए। जबकि अभी फंड का एक बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च होता।

अब बुंदेलखंड में छोड़ने की योजना
अब विभाग इन्हें 2024 में बुंदेलखंड में छोड़ने की योजना बना रहा है। बक्सवा के जंगल में इन्हें छोड़ा जाएगा। पहले इन्हें छिंदवाड़ा के जंगल में छोड़ने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह जगह इनके लिए सुरक्षित नहीं थी। दमोह, सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर वाले क्षेत्र को ज्यादा सुरक्षित पाया गया। 2018 के एक सर्वे के अनुसार यहां करीब 1800 गिद्ध थे।