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नोटबंदी: ‘फ्लॉप’ आईडिया के 5 बैड इम्पैक्ट, सरकार ने ऐसे खोया भरोसा 

ब्लैकमनी से शुरू हुई बात आज 'कैशलेस' तक आ गई। इस फैसले पर जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने नेगेटिव कमेंट दिए। इस फैसले की ऐसी ही 5 गड़बड़ियाँ इस रिपोर्ट में हम यहाँ बता रहे हैं।

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gaurav nauriyal

Dec 16, 2016

bad impact of demonetization

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गौरव नौड़ियाल@भोपाल. 8 नवंबर की रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी की घोषणा से देशभर में हलचल मची हुई है। इससे मध्यप्रदेश भी अछूता नहीं है। प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा करते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग रातभर से ही बैंक एटीएम की लाइन में खड़े हो गए।

कई एटीएम कुछ ही घंटों में 'कैश लेस' हो गए। पेट्रोल पम्प पर गाड़ियों की कतारें लग गयी और मॉल आधी रात से भी ज्यादा वक़्त तक गुलजार रहे। इस दौरान कई तरह की कहानियां सामने आई। शुरुआत में ये कहानियां मज़ेदार ज्यादा थी। अधिकांश लोग पीएम के इस फैसले से चौंक गए थे। मोदी ने लोगों को कालेधन से मुक्ति का 'ख्वाब' दिखाया!

लोगों ने मोदी के इस फैसले को बोल्ड करार दिया और सोशल मीडिया खास-ओ-आम की 'टिप्पणियों' से भरा दिखाई देने लगा। ...लेकिन कुछेक दिनों में ही इस फैसले के 'बैड इम्पैक्ट' लोगों को समझ आने लगे। लोग लाइन में खीझने लगे। नई कहानियां सामने आने लगी, जो निश्चित तौर पर इस मुल्क के मिजाज को गड़बड़ाने के लिए काफी थी।

narendra-modi-biggest-announcement-on-cashless-payment-1464686/" target="_blank">यह भी पढ़ें: कैशलेस पेमेंट पर 1 करोड़ का इनाम, कैशलेस पर कैश 'लॉस' की टेंशन

कई लोगों के पास बड़ी रकम कैश के रूप में नए नोटों में पकड़ी गई। जितना प्रधानमंत्री ने ब्लैकमनी की उम्मीद की थी उससे कई गुना ज्यादा रकम विशुद्ध रूप से 'बैंक' में पहुँच गई। कुछेक किस्से 'ब्लैकमनी' को जमा करवाने के भी आए, लेकिन ऐसे मामलों में भी झोल ही नजर आया। ब्लैकमनी से शुरू हुई बात आज 'कैशलेस' तक आ गई। इस फैसले पर जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने नेगेटिव कमेंट दिए। इस फैसले की ऐसी ही 5 गड़बड़ियाँ इस रिपोर्ट में हम यहाँ बता रहे हैं, जिससे आम लोगों को हुई परेशानियाँ...

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कमिटमेंट: सरकार ने तोड़ा भरोसा
केस 1: चार दिन बैंक का चक्कर काटने के बाद कैंसर के पेशेंट सतना निवासी श्यामलाल कोल तनय केमला प्रसाद की इलाज के अभाव में मौत हो गई। वो पेशे से शिक्षक थे। उनके बेटों ने कहा - 'यदि समय पर बैंक से रुपए मिल जाते तो शायद उनके पिता का इलाज हो जाता।' उनके बेटों का यह भी कहना है कि बैंक में पैसा होने के बावजूद हमें हमारा ही पैसा नहीं मिल पा रहा।

ऐसे टूटा कमिटमेंट: बैंक में हम इस भरोसे से अपना रुपया जमा करवातें हैं कि वह सुरक्षित रहे और जरुरत के वक्त हम अपना पैसा निकल सकें। ..लेकिन पिछले 8 नवंबर से लोगों का ये भरोसा टूटा है।


सेफ्टी: खतरे में डाली सुरक्षा
केस 2: एमपी के ही होशंगाबाद में बैंक में रुपए एक्सचेंज करने के लिए कतार में खड़े 61 वर्षीय महेश सिंह राजपूत की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वो रिटायरमेंट की जिंदगी जी रहे थे, लेकिन नोटबंदी ने उनकी सुरक्षा को एक झटके में छीन लिया। एक दुसरे मामले में सागर जिले में नोट बदलने के लिए बैंक की कतार में लगे सेवानिवृत्त कर्मचारी विनोद पांडे (70) की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

ऐसे टूटी सेफ्टी: हर नागरिक को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन जब सरकार ही 'सेफ्टी खतरे में डाल दे तब हमारे इस अधिकार के कोई मायने नहीं रह जाते। बिना तैयारी के लिए गए इस फैसले से अफरा-तफरी मच गई, जिससे लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दी।

इनसिक्यूरिटी: असुरक्षा की भावना बढ़ी
केस 3: नोटबंदी के चलते खुदरा कारोबार चौपट हुआ। ऐसे ही जबलपुर में एक ढाबा संचालक आशीष दीक्षित ने 'धंधा' मंदा होने के चलते 6 दिसम्बर को 'आत्महत्या' करने की कोशिश की। आशीष अभी भी डरा हुआ है, उसके परिवार के लोग उससे भी ज्यादा चिंतिं हैं। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और अपनी खून कमाई की मेहनत को लेकर भी लोग चिंतित हैं।

ऐसे बढ़ी इनसिक्यूरिटी: नोटबंदी के फैसले से कारोबार छोटे-छोटे कारोबार तक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। व्यापारियों की मानें तो कारोबार 25 से 40 फीसदी तक गिरा है। कई सेक्टर में ये आंकड़ा 70 फीसदी तक बढा है। कारोबार कब तक उठेगा इसकी कोई निश्चित गारंटी नहीं है।

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अनसर्टेंनिटी: अनिश्चितता बढ़ी
केस 4: भोपाल में रातीबड़ शाखा के 45 वर्षीय वरिष्ठ कैशियर पुरुषोत्तम व्यास को नोट गिनने के कारण सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। नोटबंदी के कारण बैंक कर्मचारियों पर अचानक काम का बोझ दोगुना हो गया है।

यूँ बढ़ गया अनसर्टेंनिटी का लेवल: पीएम मोदी ने पहले अपने उद्बोधन में कालेधन का 'शिगूफा' उछाला जो अब तक 6 दफा बदल गया है। भारत को कालेधन से मुक्ति से टहलता हुआ भारत अब 'कैशलेस'और 'डिजिटल मनी' की बात पर झूल रहा है। इसमें भारत का आदिवासी बहुल इलाका झाबुआ भी शामिल है और इंदौर शहर भी।

आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे बैंक में जमा होने वाली रकम बढ़ती गई वैसे-वैसे उनके भाषण से कालाधन गायब होता गया और डिजिटल या कैशलेस की बात शामिल होती गई। बैंक कर्मचारियों का काम बढ़ गया ये सच है और ये भी सच है कि लोगों में इस माहौल को लेकर अनिश्चितता धीरे-धीरे बढ़ती चली गई।

होप एंड हैप्पीनेस: टेंशन दे गई 'खुशी' और 'उम्मीद'
केस 5: शादियों के कई मामले ऐसे भी सामने आए जब शादियाँ 'खुशी' और 'उम्मीद' के बजाय टेंशन दे गए। लोगों को नोटबंदी के चलते अपने कार्यक्रम टालने पड़े। कैश के संकट में खुशियाँ भी तंग पड़ती दिखाई दी। उम्मीद थी बैंक से मदद मिलेगी लेकिन वहां कतारों और 'तय लिमिट' के अलावा तनाव ही लोगों को मिला। कई लोगों का इलाज प्रभावित हुआ, यात्राएं प्रभावित हुई और नौकरियों का संकट भी कई लोगों के सामने खड़ा हो गया।

ऐसे छिनी 'होप' एंड 'हैप्पीनेस': इस फैसले ने हमारे नैसर्गिक अधिकार 'उम्मीद' और 'ख़ुशी' दोनों को निगल लिया। कई लोगों के सामने रोजगार का संकट हुआ, जिसके लिए सीधे तौर पर नोटबंदी के फैसले को ही जिम्मेदार माना गया।

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