छोटे शहरों में बड़े हॉस्पिटल, 50 बेड वाले को भी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का दर्जा

- कैबिनेट आज :

- इधर, 30 बेड पर भी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल को मिलेगी मंजूरी
- हॉस्पिटल खोलने रियायती दर पर जमीन देगी सरकार

By: harish divekar

Published: 27 Nov 2019, 06:00 AM IST

प्रदेश के छोटे शहरों में बड़े अस्पताल लाने के लिए कमलनाथ सरकार ने अब नियमों में बदलाव करना तय किया है। इसके तहत छोटे शहरों में अस्पताल खोलने पर सरकारी मदद को करीब ढ़ाई गुना किया जाएगा। अभी सरकार 50 बिस्तर तक के अस्पताल को 3 करोड़ रुपए का अनुदान देती है, जिसे बढ़ाकर अब 7 करोड़ रुपए किया जाएगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए 100 बिस्तर की अनिवार्यता को घटाकर 50 बिस्तर किया जाएगा। साथ ही मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल भी 30 बिस्तर पर खोला जा सकेगा।

बुधवार को सीएम कमलनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में हेल्थ केयर इंवेस्टमेंट पॉलिसी 2012 में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसमें कीमोथेरेपी, रेडियो थेरेपी सहित अस्पतालों के साथ अन्य ट्रीटमेंट सेंटर के लिए अलग गाइडलाइन लाई जाएगी। साथ ही मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ग्रेड-1 के लिए 30 बिस्तर से 90 बिस्तर और मल्टी स्पेशलिटी ग्रेड टू अस्पताल के लिए सौ से ज्यादा बिस्तर होना अनिवार्य किए जाएंगे।

सरकारी मदद शहरों को तीन श्रेणियों में मिलेगी। इसमें ब व स श्रेणी के शहरों के लिए रियायती भूमि का मूल्य 75 फीसदी होगा। मेडिकल कॉलेज के लिए यह सौ फीसदी रहेगी।

मल्टी स्पेशलिटी हॉस्टिपल को यूं देंगे बढ़ावा-

अस्पताल श्रेणी- भूमि आवंटन- रियायती दर (शहरों की तीन श्रेणी में )
मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-1 - 1.5 एकड़ - अ श्रेणी पर 40 और बी एवं सी पर 75 प्रतिशत

मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-2 - 2.5 एकड़ - अ श्रेणी पर 40 और बी एवं सी पर 75 प्रतिशत
सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल - 1.5 एकड़ - अ श्रेणी पर 40 और बी एवं सी पर 75 प्रतिशत

मेडिकल कॉलेज- 25 एकड़- अ श्रेणी पर 75 प्रतिशत और बी एवं सी पर 100 प्रतिशत
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पूंजीगत अनुदान भूमि आवंटन के साथ ऐसा : शहरों की तीन श्रेणी में-
अस्पताल- अ श्रेणी शहर - बी श्रेणी शहर - सी श्रेणी शहर

मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-1 - 20 फीसदी या 2 करोड़ तक - 30 फीसदी या 3 करोड़ तक - 40 फीसदी या 4 करोड़ तक
मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-2 - 20 फीसदी या 5 करोड़ तक - 30 फीसदी या 6 करोड़ तक - 40 फीसदी या 8 करोड़ तक

सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल - 20 फीसदी या 3 करोड़ तक - 30 फीसदी या 6 करोड़ तक - 40 फीसदी या 7 करोड़ तक

पूंजीगत अनुदान भूमि आवंटन के बिना ऐसा : शहरों की तीन श्रेणी में-


अस्पताल- अ श्रेणी शहर - बी श्रेणी शहर - सी श्रेणी शहर

मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-1 - 30 फीसदी या 3 करोड़ तक - 40 फीसदी या 4 करोड़ तक - 50 फीसदी या 5 करोड़ तक
मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल ग्रेड-2 - 30 फीसदी या 6.5 करोड़ तक - 40 फीसदी या 8 करोड़ तक - 50 फीसदी या 10 करोड़ तक

सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल - 30 फीसदी या 5 करोड़ तक - 40 फीसदी या 6.5 करोड़ तक - 50 फीसदी या 8 करोड़ तक
स्टैंड अलोन हेल्थ केयर सेंटर- 30 फीसदी या 1.5 करोड़ तक - 40 फीसदी या 2.5 करोड़ तक - 50 फीसदी या 4 करोड़ तक

कोकाकोला को माफ करेंगे ब्याज-जुर्माना-

कोकाकोला को ब्याज माफ करने का प्रस्ताव भी लाया जाएगा। कंपनी को 53.75 करोड़ रुपए 16 दिसंबर 2015 तक जमा कराने थे, लेकिन 16 फरवरी 2016 को राशि जमा कराई गई। इस पर 61 दिन देरी के कारण ब्याज अतिरिक्त लगा है। अब सरकार उक्त 89.83 लाख रुपए का ब्याज माफ करने जा रही है।
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मकान बनाना हो सकता है महंगा-
सरकार गौण खनिज की रॉयल्टी में भी वृद्धि करेगी। हर तीन साल में यह रॉयल्टी बढ़ती है। इसमें रेत, गिट्टी-मिट्टी और ग्रेनाइड-मार्बल का शुल्क बढ़ाया जाता है। अब रेत की अलग नीति आ चुकी है, जबकि ग्रेनाइड-मार्बल की रॉयल्टी निर्माण सेक्टर में मंदी के कारण नहीं बढ़ाई जा रही है। केवल गिट्टी-मिट्टी-मुर्रम में राय्ॉल्टी को बीस फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। गौण खनिजों के लिए अनिवार्य भाटक दर एक लाख रुपए प्रति हैक्टेयर सालाना प्रस्तावित की गई है।

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आदिवासियों की जमीन का बदल सकेंगे लैंड-यूज-

सरकार आदिवासियों की जमीन का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में ला रही है। वर्तमान में आदिवासी अधिसूचित क्षेत्र में यदि कोई जमीन खरीदता है, तो उसका लैंड यूज दस साल के पहले नहीं बदला जा सकता। सरकार इसे खत्म करने जा रही है। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि अभी लैंड यूज न बदल पाने से विकास गतिविधियां रूक रही है। इसके अलावा कलेक्टर की मंजूरी से ही आदिवासी की जमीन को खरीदने का प्रावधान भी खत्म किया जा रहा है।

आदिवासियों की सेहत के लिए अलग नीति-

सरकार आदिवासियों की सेहत के लिए अलग से नीति ला रही है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग कैबिनेट में सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव रखेगा। इसमें आदिवासी इलाकों में आदिवासियों के लिए इलाज संबंधित अतिरिक्त मदद का प्रावधान रहेगा।

इनका कहना- आदिवासी अधिसूचित क्षेत्र में लैंड यूज बदलने या कलेक्टर की मंजूरी का प्रावधान खत्म करने का प्रस्ताव अभी पूरी तरह जानकारी में नहीं है। बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। यदि गलत प्रस्ताव है, तो उसे देखेंगे। - ओंकार सिंह मरकाम, मंत्री, आदिम जाति कल्याण विभाग, मप्र

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