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शहर में नोटबंदी जैसे हालात : 70 फीसदी एटीएम में नकदी नहीं

किसानों के खाते में पैसा पहुंचने और आरबीआई से कम राशि मिलने से बने हालात

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भोपाल. शहर में नोटबंदी जैसे हालात फिर से बनते नजर आ रहे हैं। बैंकों और एटीएम से रुपए नहीं निकल रहे। शहर के करीब 70 फीसदी एटीएम या तो बंद पड़े है या कि उनमें नोट नहीं है। राजधानी में जिन बैंकों का क्षेत्रीय कार्यालय हैं, उनमें लगे एटीएम से ही नोट नहीं निकल रहे हैं। नोटों की कमी की कारण रिजर्व बैंक से कम राशि मिलना और ज्यादातर पैमेंट किसानों के खाते में जाना बताया जा रहा है। हालांकि हालिया बैंकिंग से जुड़ी घटनाओं से ग्राहक भयभीत हैं और वह ज्यादा से ज्यादा नकदी बैंकों से निकाल रहे हैं। इससे भी एटीएम पर दबाव बना है। कई ऐसे एटीएम भी है जिनमें 200 और 2000 रुपए के नए नोटों के लिए कैलीब्रेट नहीं किया गया। ऐसे एटीएम में 100 और 500 रुपए के नोट ही डाले जा रहे हैं। इन सबके बावजूद एक सप्ताह में हालात सुधरने की बात कही जा रही है।

52 फीसदी एटीएम ही कैलिब्रेट
बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि 200 रुपए के नए नोट के लिए एटीएम की कैश -ट्रे में बदलाव का काम अब तक 52 फीसदी ही हुआ है। 48 फीसदी होना बाकी है। जो एटीएम कैलिब्रेट नहीं हुए हैं, उनमें 200 रुपए के नोट ही नहीं डाले जा रहे।

शादी-विवाह और फसल में जा रहा पैसा
वैवाहिक सीजन के चलते नकदी बैकों से निकलकर बाजारों में पहुंच रही है। लोग जरूरत के हिसाब से बैंकों से नकदी निकाल रहे हैं। यह पैसा वापस बैंकों में नहीं जा रहा। इसी प्रकार कृषि सीजन होने के कारण बैंकों का पैसा किसानों के पास ज्यादा पहुंच रहा है। यह भी रुपयों की कमी का एक कारण माना जा रहा है। रुपयों की निकासी के लिए बैंक की शाखाओं और एटीएम तक में लोगों को परेशान होता हुआ देखा जा रहा है।

दो हजार की जगह लाए दो सौ का नोट
सेन्ट्रल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गत वर्ष मई में दो हजार के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी। इसके बदले दो सौ और पांच सौ रुपए के नोटों को लाया गया। अगर दो हजार के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपए तक आ जाते हैं। पांच सौ और सौ के नोटों से ये क्षमता लगभग 15 से 20 लाख रुपए रह गई है। नोटों की कमी का एक कारण यह भी है।


हां, यह सही है कि नोटों की कमी है। डिमांड एकाएक बढ़ गई है। ज्यादातर रुपए किसानों के खातों में जा रहे हैं। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। एकाध सप्ताह में कैश की स्थिति सुधर जाएगी। ग्राहकों को डिजिटल मोड का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

-अजय व्यास, फील्ड महाप्रबंधक एवं कन्वीनर एसएलबीसी, सेन्ट्रल बैंक

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