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ABHA health ID: आभा ID बनाने में भोपाल सबसे आगे, एम्स ने बनाई 9 लाख ID

आभा आइडी में मरीज की बीमारियों और दवाइयों के पूरे ब्योरे का रिकॉर्ड रहता है....

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ABHA ID

भोपाल। केन्द्र सरकार की ओर से शुरू किए गए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अभी तक एम्स भोपाल ने सबसे ज्यादा आभा आइडी बनाई हैं। दूसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ का एम्स रायपुर है। हालांकि इसके उपयोग के मामले में दिल्ली सबसे आगे है। स्कैन और शेयर में रायपुर दूसरे और भोपाल तीसरे स्थान पर है। आभा आइडी में मरीज की बीमारियों और दवाइयों के पूरे ब्योरे का रिकॉर्ड रहता है।

आभा आइडी की विशेषताएं

-यह स्वास्थ्य आईडी हर नागरिक की बनाई जानी है।

-यह स्वास्थ्य खाते के रूप में काम करेगी, जिसमें इलाज से जुड़ी हर जानकारी रहेगी।

-प्रत्येक परीक्षण, बीमारी, डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कब ली गई, दवाओं और निदान का विवरण होगा।

-एकत्र डेटा का विश्लेषण समेत कारगर योजनाएं बनाने से लेकर बजट तय करने में मदद करेगा।

-स्कैन एंड शेयर चिकित्सालयों में प्राथमिकता के आधार पर पंजीयन, लंबी कतार और समय की बर्बादी से बचाएगा।

-बार-बार पूरी फाइल ले जाने की जरूरत नहीं होती है।

-स्कैन एंड शेयर सुविधा का उपयोग

एम्स - सुविधा लेने वाले लोगों की संख्या

नई दिल्ली - 7,17,587
रायपुर - 2,70,596
भोपाल - 2,39,771
भुवनेश्वर - 2,32,319
गुंटूर - 1,34,356
ऋषिकेश - 1,00,905
पटना - 99,877

(सभी आंकड़े शनिवार तक के हैं)

आंकड़ों के अनुसार, सभी एम्स ने मिलकर 9 लाख लोगों की आभा आइडी बनाई। इसमें सबसे अधिक एम्स भोपाल ने 1 लाख 28 हजार लोगों को आभा आइडी से जोड़ा है। इसके जरिए ओपीडी पंजीकरण से लेकर स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करने में 7 लाख लोगों के साथ एम्स दिल्ली सबसे आगे है। भोपाल में यह संख्या महज दो लाख 40 हजार और रायपुर में 2 लाख 70 हजार है।

डिजिटलीकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को मरीजों के स्वास्थ्य आइडी के साथ जोड़ने में अग्रणी स्थान और स्कैन में तीसरा स्थान हासिल किया है। एम्स भोपाल इन पहल के माध्यम से मरीजों की सेवा को समर्पित है। - डॉ. अजय पाल सिंह, निदेशक, एम्स भोपाल

दिल्ली में लोग ज्यादा जागरूक

एम्स भोपाल प्रबंधन के अनुसार लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और उनकी आभा आइडी बनाने 200 टेबलेट्स मंगाए हैं। प्रदेश के अन्य अस्पताल यह कार्य तेजी से नहीं कर रहे हैं। वहीं दिल्ली में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रति ज्यादा जागरूकता है। हर अस्पताल आइडी बना रहा है। एम्स दिल्ली में मरीजों की संख्या भी अधिक है। यही वजह है कि एम्स दिल्ली में अब तक सात लाख से अधिक मरीज स्कैन एंड शेयर सुविधा का लाभ ले चुके हैं।