9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चुनाव के आते ही शुरु हो गया सात साल से रुका काम.. पढ़ें पूरी खबर!

मिसरोद-होशंगाबाद एक्सप्रेस-वे... आखिरकार सात साल बाद 10 लेन पर शुरू हुआ काम

2 min read
Google source verification
road

भोपाल। आखिर सात साल बाद भोपाल से होशंगाबाद 10 लेन एक्सप्रेस-वे का काम शुरू हो ही गया। मिसरोद बीआरटीएस के आखिरी छोर से शुरू होकर ये रूट होशंगाबाद के पास विनेका तक जाएगा। एक्सप्रेस-वे पर फर्राटेदार वाहनों के आने-जाने के लिए छह रूट बनेंगे, जबकि टू-व्हीलर्स के लिए दोनों तरफ दो-दो सर्विस रोड होगी। एक्सप्रेस-वे पर एंट्री-एक्जिट कंट्रोल करने के लिए पूरे रूट पर पेड़-पौधे लगे कांक्रीट डिवाइडर होंगे। पहले फेज में मिसरोद से मंडीदीप तक 14 किमी लंबे रूट को दस लेन में तब्दील करने दिल्ली की प्रायवेट फर्म सीडीएस और एमपीआरडीसी ने मैदानी काम शुरू कर दिया है। दूसरे फेज में मंडीदीप से औबेदुल्लागंज बायपास तक 5.60 किमी और आखिरी फेज में औबेदुल्लागंज बायपास से विनेका तक 29.80 किमी रूट बनाया जाएगा। शुक्रवार को मंत्रालय में प्रमुख सचिव ने प्रोजेक्ट की बारीकियों पर एमपीआरडीसी-प्रायवेट फर्म का प्रजेंटेशन देखने के बाद डेडलाइन में काम खत्म करने कहा।

अगस्त 2019 से टोल वसूली का प्रस्ताव
मिसरोद-होशंगाबाद 10 लेन एक्सप्रेस-वे को 18 माह में तैयार किया जाएगा। टाइम मार्च 2018 से शुरू हो गया है और अगस्त 2019 से प्रायवेट कंपनी ने मिसरोद से प्रवेश करने वाले वाहनों से टोल वसूली का प्रस्ताव दिया है। हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी ने कंपनी को दोनों जिलों के कलेक्टरों से तालमेल बनाकर चलने कहा है। होशंगाबाद से भोपाल तक 70 किमी का मौजूदा मार्ग फिलहाल बेहद जर्जर हो चुका है। इसके चलते एक घंटे का सफर पूरा करने में अभी करीब ढाई घंटे लग जाते हैं।

एक नजर में समझें प्रोजेक्ट
मिसरोद से मंडीदीप तक 8 लेन सड़क में 7 मीटर चौड़ा फोर लेन रूट बनेगा।
रूट के दोनों तरफ 7.5 मीटर की सर्विस रोड होगी।
रूट के सेंटर में 9.5 मीटर चौड़ा डिवायडर होगा।
सर्विस रोड पर पैदल चलने के लिए 2-2 मीटर चौड़े फुटपाथ।
भोपाल बायपास, मंडीदीप, नयापुरा तथा औबेदुल्लागंज बायपास पर ग्रेड सेपरेटर।
बंसल कॉलेज, राज हाइट्स तथा सिमराई में अंडरपास बनेंगे।

मिसरोद से मंडीदीप के बीच काम शरू हो गया है। प्रोजेक्ट 18 माह में पूरा करने का टारगेट है।
-पवन अरोड़ा, प्रोजेक्ट इंचार्ज, एमपीआरडीसी