
अधिवक्ता
भोपाल : प्रदेश में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में अब एआईसीसी का दखल भी रहेगा। नए अधिवक्ताओं की नियुक्ति या पिछली बार नियुक्त हुए शासकीय अधिवक्ताओं की अवधि बढ़ाने से पहले भी एआईसीसी की सहमति लेनी होगी। ये पूरा मामला समन्वय समिति में जाएगा। समन्वय समिति में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव भी हैं। इन सभी के सामने शासकीय अधिवक्ताओं के रुप में नियुक्ति पाने वाले वकीलों के नाम रखे जाएंगे। सभी की सहमति के बाद इस सूची पर मुहर लगाई जाएगी। इस बार कांग्रेस सरकारी वकीलों की नियुक्ति में किसी किस्म का विवाद नहीं चाहती इसलिए वो फंूक-फूंक कर कदम रख रही है।
पिछली बार भाजपा समर्थित वकीलों की हो गई थी नियुक्ति :
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जब शासकीय अधिवक्ताओं के रुप में वकीलों की नियुक्ति की गई थी तो वो विवादों में आ गई थी। कांग्रेस से जुड़े वकीलों ने आरोप लगाया था कि भाजपा के लोगों की नियुक्तियां कर दी गई हैं। ये विवाद इंदौर और ग्वालियर में ज्यादा उठा था। ग्वालियर में तो कांग्रेस के विधि एवं मानव अधिकार विभाग के वकीलों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी भी दी थी। ये विवाद एआईसीसी तक पहुंच गया था। यही कारण है कि इस बार सभी नेताओं की सहमति और सूची की जांच पड़ताल के बाद ही शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी।
- समन्वय समिति ने ये फैसला भी लिया है कि शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति या नवीनीकरण से पहले समिति की बैठक में उन नामों पर विचार होगा तभी उन पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। - दीपक बावरिया प्रदेश प्रभारी,कांग्रेस -
Published on:
25 Feb 2020 07:55 pm

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