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AIIMS- आपको रिपोर्ट संभालने की टेंशन खत्म ऑनलाइन होंगे सारे दस्तावेज

एम्स में अब मरीजों की रिपोर्ट होंगी ऑनलाइन...

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भोपाल

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Sunil Mishra

Dec 04, 2018

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भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल मरीजों को बड़ी सुविधा देने जा रहा है। एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को अब जांच रिपोर्ट लेकर अस्पताल नहीं आना पड़ेगा।

मरीजों की सारी रिपोर्ट्स अब ऑनलाइन जमा रहेंगी। इस सुविधा के बाद मरीजों को अपनी रिपोर्ट संभालने या गुम जाने की दिक्कतों से मुक्ति मिल जाएगी। जानकारी के मुताबिक एक महीने के भीतर यह सुविधा शुरू हो जाएगी।

मरीजों के साथ अस्पताल का समय बचेगा

एम्स में हर रोज करीब 15 सौ मरीज इलाज करने पहुंचते हैं। ओपीडी काउंटर में इन मरीजों की फाइल तैयार होती है। इसमें मरीज का नाम, पता व अन्य ब्यौरा दर्ज होता है।

इसके चलते फाइल तैयार करने में वक्त लगता है और गलतियां भी होती हैं। इस वजह से मरीज परेशान होते हैं। एम्स की वेबसाइट पर मौजूद इस पोर्टल पर जाकर नए मरीज अपना ब्यौरा खुद दर्ज कर सकते हैं। ऐसा करने पर उन्हें ऑनलाइन यूनिक स्वास्थ्य नंबर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

रिपोर्ट भी ऑन लाइन मिलेगी

सिर्फ ओपीडी के पर्चे ही नहीं मरीजों की सारी प्रिसक्रिप्शन और उनकी जांच पर्चे भी ऑनलाइन अपलोड कर दिए जाएंगे मरीज अपने यूनिक नंबर से इन रिपोर्ट को कभी भी देख सकता है और अगर जरूरत हो तो उसका प्रिंट आउट पर निकलवा सकता है ऐसे में मरीजों को अपने दस्तावेज खोने का डर नहीं होगा।


अभी सिर्फ ऑनलाइन अपॉइंटमेंट

एम्स में अभी सिर्फ ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ही दिए जा रहे हैं मरीजों को इसके लिए कम से कम 1 दिन पहले एम्स की वेबसाइट पर जाकर पेमेंट लेना होता है इस सुविधा के आने के बाद अब मरीजों को लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ता।

मोबाइल और मेल पर भी मिलेगी जानकारी

मरीज के ओपीडी में डॉक्टर को बीमारी बताने पर मोबाइल नंबर या अपना ई-मेल आईडी देना होगा। इससे समय-समय पर उसके मोबाइल या मेल पर जांच रिपोर्ट मिलती रहेगी। एक्सरे के लिए भी अस्पताल के चक्कर नहीं काटना होंगे। इलाज के बाद पर्चा गुम होने पर मरीज के आईडी नंबर से ही पूरी जानकारी ली जा सकती है।

ये होंगे फायदे

-डॉक्टरों व अस्पताल के स्टाफ के कामकाज पर रखी जा सकेगी नजर।

-मरीज का रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर में होने पर मरीज के रेफर होने के साथ ही उसका प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज ई-मेल से भेजे जा सकेंगे।

-अस्पताल के डॉक्टर के हर डेस्क पर कम्प्यूटर होने से काम में तेजी आएगी और मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।

-दवाओं की मात्रा की जानकारी भी रखी जा सकेगी।

-एचएमआईएस सॉफ्टवेयर से डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों को मैसेज भी कर सकते हैं।

-कम्प्यूटर स्क्रीन पर मरीज की पूरी जानकारी के साथ ही पता चलेगा कि उसे पहले से कौन सी दवा दी जा रही है। समय बचेगा