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एमपी को जल्द मिलेंगे नए IPS, 66 अफसरों की कमी दूर करने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का बड़ा फैसला

IPS- एमपी में 66 IPS की कमी, कैट ने 120 दिनों में रिव्यू करने के निर्देश दिए

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CM's announcement regarding promotion of MP police officers

CM's announcement regarding promotion of MP police officers

IPS- मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में IPS अफसरों का टोटा जल्द ही खत्म हो सकता है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने इस संबंध में राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कैट ने सरकार को 120 दिन में हर हाल में IPS कैडर रिव्यू करने को कहा है। प्रदेश में यह प्रक्रिया करीब दो दशकों से अटकी पड़ी है। इससे राज्य में करीब 66 आईपीएस अधिकारियों की कमी बनी हुई है। यहां तक कि प्रदेश में अगले कुछ सालों में पुलिस महानिदेशक पद के लिए भी संकट आ रहा है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के इस फैसले से राज्य सेवा के अधिकारियों के IPS बनने की राह खुल गई है।

नियमानुसार हर 5 साल में प्रदेश में IPS कैडर रिव्यू का प्रावधान है। राज्य में यह प्रक्रिया करीब 20 साल से लंबित है। कैडर रिव्यू नहीं होने का कई चीजों पर असर हो रहा है। इससे राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को IPS प्रमोशन से वंचित होना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है ​जब राज्य में IPS अधिकारियों की जबर्दस्त कमी है।

प्रदेश में 66 IPS अधिकारियों की कमी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार एमपी में आईपीएस IPS के कुल 319 पद स्वीकृत हैं। इनकी तुलना में अभी केवल 253 IPS ही कार्यरत हैं। IPS के जो पद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को पदोन्नत कर भरे जाते हैं, कैडर रिव्यू के अभाव में ऐसे प्रमोशन तय नहीं हैं। राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को प्रमोट कर प्रदेश में 66 IPS अधिकारियों की कमी कुछ हद तक पूरी की जा सकती है।

कैडर रिव्यू नहीं होने से प्रदेश के कई पुलिस अधिकारियों का IPS बनने का सपना टूट रहा है। उनके प्रमोशन की राह ही बंद पड़ी है। IPS कैडर के लिए 56 साल की आयु निर्धारित है। कैडर रिव्यू नहीं होने से कई अधिकारी इस उम्र सीमा का पार करने की कगार पर हैं। इससे अगले कुछ सालों में प्रदेश में पुलिस महानिदेशक यानि डीजी के योग्य अधिकारियों की भी कमी हो सकती है।

IPS कैडर रिव्यू में विलंब पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कैट की जबलपुर पीठ ने हर हाल में 120 दिन में अतिरिक्त कैडर रिव्यू करने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने केंद्र और राज्य सरकार को प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

आईपीएस (कैडर) नियम 1954 के तहत हर 5 साल में कैडर रिव्यू अनिवार्य

कैट का कहना है कि कैडर रिव्यू के अभाव में राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को आईपीएस प्रमोशन से वंचित होना पड़ रहा है। जस्टिस अखिल श्रीवास्तव और प्रशासनिक सदस्य मलिका आर्य की पीठ ने कहा कि आईपीएस (कैडर) नियम, 1954 के तहत हर 5 साल में कैडर रिव्यू अनिवार्य है। इससे राज्य के अधिकारियों के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और पदोन्नति पर विचार का अधिकार प्रभावित हो रहा है।

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