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भारत बंद की घोषणा ने ही बढ़ा ​दी इस सरकार की चिंता, सभी जिलों में Alert जारी

भारत बंद: 2 अप्रैल के बाद अब फिर 9 अगस्त का ऐलान...

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भारत बंद की घोषणा ने ही बढ़ा ​दी इस सरकार की चिंता, सभी जिलों में Alert जारी

भोपाल। एक बार फिर दलित संगठनों द्वारा भारत बंद की घोषणा के साथ ही मध्यप्रदेश सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच आई हैं। दरअसल पिछले दिनों भारत बंद के दौरान राज्य में हुई हिंसक झड़पों ने सरकार तक की नींद उड़ा कर रख दी थी। जानकारो के मुताबिक ऐसे में चुनाव से ठीक पहले सरकार ऐसी किसी स्थिति को प्रदेश में नहीं चाहती है जो उसके चुनाव को प्रभावित करें। वहीं एक बार फिर भारत बंद की घोषणा ने सरकार के कान खड़े कर दिए हैं।

आंदोलन विफल करने में मंत्रियों को लगाया...
दरअसल भारत बंद की इस धमकी ने मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह सरकार की चिंताएं बढ़ा दीं हैं। ऐसे में बीजेपी ने अनुसूचित जाति वर्ग के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों की डयूटी लगा दी है कि दलित समाज को इस आंदोलन से दूर रहने के लिए समझाइश दें।

जानकारों का मानना है कि मध्यप्रदेश में वर्ग संघर्ष का माहौल चल रहा है। 2 अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा बुलाया गया भारत बंद ग्वालियर, भिंड एवं मुरैना में हिंसक हो गया था। दोनों वर्ग आमने सामने आ गए थे। आम जन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

इस घटना ने भाजपा को काफी नुक्सान पहुंचाया था। अब चुनावी माहौल है। ऐसे में यदि यह आंदोलन मध्यप्रदेश में भड़क जाता है तो इससे कांग्रेस को काफी फायदा होगा।

दलित समाज की समझाइश के लिए मंत्री लाल सिंह आर्य, गौरीशंकर शेजवार, सूर्य प्रकाश मीणा, सांसद थावर चंद्र गहलोत, वीरेंद्र कुमार, डॉ भागीरथ प्रसाद, मनोहर ऊंटवाल, चिंतामणि मालवीय समेत कई नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, कि वो मध्यप्रदेश में इस आंदोलन को पूरी तरह से विफल बनाएं।

वहीं इसके अलावा पुलिस मुख्यालय ने भी सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट कर दिया है।

ये है मामला
दरअसल दलित संगठनों द्वारा एक बार फिर भारत बंद की आग सुलगाई जा रही है। इस मामले में लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भारत बंद के नेता बनकर सामने आए हैं।

उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो अगले महीने उनकी पार्टी (LJP) दलित संगठनों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। उन्होंने चेताया कि 9 अगस्त को दलित संगठनों द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन दो अप्रैल के 'भारत बंद' से भी ज्यादा 'आक्रोशित और अधिक तीव्र' हो सकता है।