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अनोखी शादी- बैंड, बाजा, बाराती, घराती, खाना-पीना सबकुछ था, पर गायब थे दूल्हा-दुल्हन

तुलसी विवाह का आयोजन किया गया, जहां पूरे समाज ने मिलकर विवाह की सभी रस्म अदा कीं।

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Anwar Khan

Nov 17, 2016

Amazing tulsi vivah in ratlam india by madan lal s

Amazing tulsi vivah in ratlam india by madan lal sharma

भोपाल। तुलसी जी की पूजा तो हर घर में की जाती है पर ऐसे अनूठी श्रृद्धा केवल रतलाम के आलोट तहसील में ही देखने मिलती है, जहां देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का शानदार आयोजन किया गया। लोग जहां घरों में माता तुलसी को पूज रहे थे वहीं दूसरी ओर यहां लोग शालिगराम और तुलसी के विवाह में खुश होकर नाच रहे थे।

आलोट में देवउठनी एकादशी के दिन मदन लाल शर्मा ने अपनी पत्नी सरस्वती शर्मा के साथ गांव में तुलसी विवाह का आयोजन किया। उन्होंने तुलसी को अपनी बेटी स्वीकार करते हुए गांव के ही मुरलीधर मंदिर से कन्यादान किया। यहां विवाह की सारी रस्मे निभायी गईं। तुलसी जी ने शालिगराम जी के साथ सात फेेरे लिए, मंगलसूत्र पहना और अंत में विदा हो गईं। इस समारोह में पूरे गांव को भोज पर आमंत्रित किया गया था। मानदानों को उपहार दिए गए और गाजे-बाजे के साथ शादी का समापन हुआ।

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यह है तुलसी विवाह का रहस्य
पुराणों में लिखा है की माता तुलसी के पति जालंधर बहुत ही अत्याचारी थे। यहां तक कि भगवान विष्णु को भी जालंधर ने ललकार कर युद्ध किया था। भगवान् विष्णु ने तुलसी से प्रसन्न हो कर वरदान दिया था जब तक तुम मेरी पूजा में लिप्त में रहोगी, तब तक तुम्हारे पति को कोई नहीं मार सकता। जब कभी भी जालंधर युद्ध पर जाता था तो तुलसी भगवान् विष्णु की पूजा करने लगती थी। भगवान विष्णु को मजबूरन तुलसी के पूजा को सफल बनाना पड़ता। भगवान शिव ने विष्णु जी से कहा जब जालंधर युद्ध पर जाए तो, आप उसका का रूप ले कर तुलसी के पास जाएं तो वह पूजा नहीं करेगी, उसी समय मैं उसका वध कर दूंगा।

जैसे ही जलांधर युद्ध पर गया उसी समय विष्णु जी उसका का रूप रखकर उसके पास आए। तुलसी से प्रेम करने लगे और उनका पतिव्रता का व्रत तोड़ दिया। इससे जलांधर की शक्ति क्षीण हो गई और भगवान शिव ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। सर धड़ से अलग होने के बाद वह तुलसी के गोद में गिर गया। कटे धड़ से आवाज आई तुलसी तेरे साथ छल हुआ है ये वहीं छलिया है जिसकी तू पूजा करती है।

इसके बाद भगवान विष्णु अपने असली रुप में आ गये। तुलसी को गहरा आघात पहुंचा और कहा, भगवन मैं बचपन से आपको पूजती आ रही हूं आपने मेरे साथ छल किया। तुलसी ने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि आपने मेरी भावनाओं की कद्र नहीं कि और पत्थर की तरह व्यवहार किया इसलिये आप पत्थर के हो जाओगे।

समस्त देवता त्राहि-त्राहि पुकारने लगे, तब माता लक्ष्मी ने तुलसी के चरण पकड़ कर प्रार्थना की। तब तुलसी ने जगत कल्याण के लिये अपना श्राप वापस ले लिया और खुद जलांधर के साथ सती हो गई। खुद के एक रुप को पत्थर में समाहित करते हुए विष्णु जी कहा कि आज से तुलसी के बिना मैं प्रसाद स्वीकार नहीं करुंगा। इस पत्थर को शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा। कार्तिक महीने में तो तुलसी जी का शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है।

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