पुराणों में लिखा है की माता तुलसी के पति जालंधर बहुत ही अत्याचारी थे। यहां तक कि भगवान विष्णु को भी जालंधर ने ललकार कर युद्ध किया था। भगवान् विष्णु ने तुलसी से प्रसन्न हो कर वरदान दिया था जब तक तुम मेरी पूजा में लिप्त में रहोगी, तब तक तुम्हारे पति को कोई नहीं मार सकता। जब कभी भी जालंधर युद्ध पर जाता था तो तुलसी भगवान् विष्णु की पूजा करने लगती थी। भगवान विष्णु को मजबूरन तुलसी के पूजा को सफल बनाना पड़ता। भगवान शिव ने विष्णु जी से कहा जब जालंधर युद्ध पर जाए तो, आप उसका का रूप ले कर तुलसी के पास जाएं तो वह पूजा नहीं करेगी, उसी समय मैं उसका वध कर दूंगा।