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atank: जानिए किसके बुलावे पर मध्यप्रदेश आया था आतंकी अहमद

पैरवास में रुका था अहमद

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atank: जानिए किसके बुलावे पर मध्यप्रदेश आया था आतंकी अहमद

atank: जानिए किसके बुलावे पर मध्यप्रदेश आया था आतंकी अहमद

भोपाल. प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-ए-मुजाहिद्दीन (बांग्लादेश) के आतंकियों की राजधानी से धरपकड़ और पूछताछ से मिली जानकारी से प्रदेश के उन ग्रामीण क्षेत्रों से आतंकियों के तार जुडऩे की पुष्टि हुई है, जहां पूर्व में इस तरह की गतिविधियां तकरीबन शून्य थीं। मप्र एटीएस ने आतंकियों के दो मददगारों को विदिशा जिले के नटेरन ब्लॉक के पैरवास निवासी अब्दुल कय्यूम और हैदरगढ़ गांव के साहवान को गिरफ्त में लिया था।
जानकारी के मुताबिक दीनी तालीम की आड़ में अब्दुल करीम ने ही मप्र में आतंकियों की एंट्री करवाई। अब्दुल करीब पांच साल पहले दीनी तालीम लेने उप्र के देवबंद गया था। वहां दो साल पहले उसकी बांग्लादेशी आतंकी मोहम्मद अकील उर्फ अहमद और उसके साथियों से मुलाकात हुई। मप्र में आतंकी संगठन के पैर जमाने के लिए अब्दुल ने इन आतंकियों को मदद का भरोसा दिया। इसी के चलते अहमद पिछले साल अब्दुल के गांव पैरवास आया। यहां वो दो दिन रुका। अब्दुल ने घरवालों को बताया कि अहमद मुस्लिम धर्मग्रंथों की पढ़ाई कर रहा है। अब्दुल ही वही शख्स है, जिसने हैदरगढ़ निवासी साहवान की मुलाकात इन आतंकियों से करवाई थी। साहवान आतंकियों को एक से दूसरी जगह ले जाने समेत अन्य कामों में मदद करता था। एटीएस अन्य जिलों समेत विदिशा के दूरदराज के क्षेत्रों में आतंकियों के मददगारों की तलाश में जुटी है। इधर, राजधानी से पकड़ाए चारों आतंकियों की रिमांड अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है। इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। एटीएस रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है।
दीनी तालीम लेने गया था महाराष्ट्र
अब्दुल करीम ने शुरुआती दीनी तालीम नटेरन ब्लॉक के सेऊ गांव के मदरसे से ली। इसके बाद वह देवबंद गया। वहां बांग्लादेशी आतंकियों से मिला। अब्दुल ने खुद की गतिविधियां पूर्व की तरह रखीं और महाराष्ट्र के नंदूरबाद के अक्कलकुवा में दीनी तालीम के लिए गया।
दीनी तालीम पूरी होने के बाद अब्दुल विदिशा के लटेरी ब्लॉक के ग्राम मुरवासा में मौजूद मदरसे में पढ़ाने लगा। इधर, वह बांग्लादेशी आतंकियों के संपर्क में बना रहा और स्लीपर सेल बनाने में मदद करता रहा।

ऐसे पकड़ में आया अब्दुल करीम
बांग्लादेशी आतंकियों की योजना मप्र के शहरी और खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे मदरसों के जरिये जेहादी सोच को युवाओं तक पहुंचाने और उन्हें स्लीपर सेल में सक्रिय करना था। इसके लिए उन्होंने राजधानी से सटे विदिशा जिले के दूरदराज के उन गांवों को टारगेट किया, जहां मदरसों की तादाद अच्छी खासी है। 12 और 13 मार्च की दरमियानी रात राजधानी से जब चार आतंकियों की गिरफ्तारी हुई, उसके एक दिन पहले अब्दुल कय्यूम महाराष्ट्र के मदरसे में आयोजित सालाना जलसे में डिग्री ले रहा था। इस दौरान उसके माता-पिता भी वहां मौजूद थे। जलसे के बाद अब्दुल वहीं रुक गया था। साहवान से मिली जानकारी के बाद एटीएस ने मुरवासा के मदरसे की ओर रुख किया। यहां मौलवी को विश्वास में लेकर अब्दुल को फोन कर बुलवाया और 17 मार्च को उसे दबोच लिया।