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बरगद,पीपल भी तनाव झेलते हैं, बीमारियों से लडऩे की इनमें क्षमता ज्यादा

बरगद, पीपल और कई अन्य वनस्पतियां भी तनाव झेलती हैं। लेकिन इनमें बीमारियों से लडऩे की क्षमता ज्यादा होती है। इसलिए इनकी उम्र कई बार हजार साल से ज्यादा होती है।

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भोपाल. बरगद, पीपल और कई अन्य वनस्पतियां भी तनाव झेलती हैं। लेकिन इनमें बीमारियों से लडऩे की क्षमता ज्यादा होती है। इसलिए इनकी उम्र कई बार हजार साल से ज्यादा होती है। राजधानी स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आइसर) के विज्ञानियों के शोध निष्कर्ष में यह बातें उजागर हुई हैं।
सहनशीलता के जीन विकसित
आइसर के विज्ञानियों के शोध में खुलासा हुआ है कि बरगद और पीपल के पेड़ कैसे सदियों तक जीवित रहते हैं। इन पेड़ों के जीनोम अनुक्रम किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उनके लंबे जीवन का सबसे बड़ा कारण यह है कि इन पेड़ों में उनके वृद्धि और तनाव व सहनशीलता से संबंधित जीन विकसित हुए हैं। कई पेड़ तो एक हजार साल तक भी जीवित रहते हैं। विज्ञानियों को इस अनुक्रम को पूरा करने में करीब चार साल का समय लगा। उनका दावा है कि ऐसी कोशिश विश्व में पहली बार की गई है। आइसर के जैविक विज्ञान विभाग के चार शोधार्थियों की टीम ने इसे पूरा किया।
जीनोम संरक्षित
ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इसका असर मानव जीवन पर ही नहीं बल्कि वन्य जीव एवं पेड़-पौधों पर भी हो रहा है। भविष्य के खतरे के देखते हुए आइसर के विज्ञानियों ने राष्ट्रीय पशु, पक्षी एवं पेड़ के साथ कुछ औषधीय पौधों के जीनोम को संरक्षित किया है। ताकि इन्हें लुप्त होने से बचाया जा सके।
बीमारियों का इलाज संभव
आइसर के जैविक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विनीत के शर्मा ने बताया कि बरगद एवं पीपल के अलावा गिलोय, जामुन आदि पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर हैं। जिस तरह से ये पेड़ अपनी बीमारियों से लड़ते हैं, उसी तरह ये हमारी भी रक्षा कर सकते हैं। इनकी पत्तियों, तना आदि से निकला रस इंसानों को भी बीमारियों से बचाता है।
उपयोगी है पीपल
पीपल के पत्ते के रस से पीलिया, कब्ज, बुखार, डायबिटीज आदि बीमरियों से लडऩे की क्षमता है। वहीं बरगद के पत्ते का रस डायरिया, उल्टी, दस्त आदि बीमारियों में कारगर साबित होता है।
टाइगर और मोर पर शोध
प्रोफेसर विनीत के शर्मा ने बताया कि आइसर ने मोर एवं टाइगर के जीनोम को भी संरक्षित किया है। ताकि भविष्य के इनके ऊपर आने वाले खतरे से इन्हें बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि जीनोमिक्स एक ऐसा विज्ञान है जिसमें हम डीएनए अनुक्रमण तकनीक एवं जैव सूचना विज्ञान का उपयोग करकर जीनोम की संरचना, कार्य एवं अनुक्रमण का अध्ययन करते हैं। जीनोमिक्स से जीवों के संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण का पता लगाया जा सकता है।