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यहां मिला दर्लभ प्रजाति के उल्लू का जोड़ा, एक पक्षी की कीमत है 30 से 40 लाख

Barn owl प्रजाति का ये उल्लू एक साल में खा सकते हैं 25 हजार चूहे, ब्लेक मार्केट में इनकी कीमत ही 30 से 40 लाख रुपये

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यहां मिला दर्लभ प्रजाति के उल्लू का जोड़ा, एक पक्षी की कीमत है 30 से 40 लाख

भोपाल/ ये बात तो हम सभी जानते हैं कि, उल्लू पक्षी की प्रजाति विलुप्ति की कगार पर आ पहुंची है। हालांकि, इस पक्षी की और भी कई प्रजातियां हैं। इन्ही में से एक है बार्न आउल यानी खलिहान उल्लू। इस प्रजाति के उल्लू अब भारत में गिनती के ही बचें हैं। ये इतने कम हैं कि, इनकी गणना कर पाना भी आसान काम नहीं है। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे ग्राम फंदा के अमरोदा में एक किसान के घर में बार्न आउल प्रजाती के उल्लू का एक जोड़ा घायल अवस्था में मिला हैं। किसान उल्लू के जोड़े को पकड़कर पहले सोचा कि, उनका उपचार कराकर उन्हें छोड़ देगा। लेकिन, बाद में उसे पता लगा कि, इस तरह का उल्लू अब विलुप्ति की कगार पर है। ऐसे में उसने सोचा कि उल्लू के जोड़े को वन विभाग को सोंपना ज्यादा बेहतर होगा।

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पुरानी दीवार गिरने पर मिले उल्लू

इसके बाद किसान ने वन विभाग को सूचित कर उसे तत्काल वन विहार पहुंचाया गया। यहां डॉक्टरों की निगरानी में इन पक्षियों का उपचार शुरु हो गया है। जिले के अमरोदा निवासी किसान, सोनू मेवाड़ा ने बताया कि, बारिश से लचर होकर कुछ समय पहले उनके पुराने घर की दीवार गिर गई थी, उस तरफ कोई रहता भी नहीं था, लेकिन शनिवार को दीवार की मरम्मत कराने पहुंचे तो वहां उन्हें अजीबोगरीब आवाजें सुनाई दीं। इस तरह की अनजान आवाजें सुनकर पहले तो उन्हें थोड़ा डर लगा, लेकिन टूटी दीवार के पीछे झांकने पर उन्हें वहां बार्न आउल प्रजाति के उल्लू का एक जोड़ा दिखा, जो घायल अवस्था में था। सोनू के मुताबिक, उन्हें पक्षियों की हालत पर दया आई और उन्होंने सोचा कि, इनका उपचार कराना चाहिए।

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इस वजह से लिया वन विभाग को सौंपने का फैसला

सोनू ने घायल जोड़े के उपचार का मन तो बना लिया था, लेकिन उसके सामने बड़ी चुनौती ये भी थी कि आखिरकार उन पक्षियों का उपचार कराया कहां जाए। ऐसे में उन्होंने ग्रामीणों की मदद से कुछ टोना-टोटका करने वालों से भी संपर्क किया ताकि उन्हें पता चल सके कि घायल पक्षियों का उपचार कहां और कैसे हो सकता है। हालांकि, उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली इसके बाद उन्हें किसी परिचित ने बताया कि, ये कितने रेयर उल्लू है। इसके बाद सोनू ने उन पक्षियों को वन विभाग को सौंपने का निर्णय लिया।

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इस प्रजाति की खुराक जानकर रह जाएंगे आप

दरअसल, ग्रामीणों में उल्लू को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। नाखून, दांत, हड्डियां तक टोने टोटके में इस्तेमाल होती हैं। कई कु मान्यताएं तो यहां तक हैं कि, इसकी बलि देने से व्यक्ति धनवान हो जाता है और अपनी किसी भी इच्छा को पूरा कर लेने में सक्षम हो जाता है। इसी लिए इसके अंगों का इस्तेमाल तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। जानकारी के मुताबिक, वैसे तो किसी आम उल्लू की कीमत उसकी उम्र और वजन के आधार पर तय होती है। जो करीब 1 लाख रुपये तक होती है। लेकिन तंत्र विद्या में इस प्रजाति के उल्लू की अधिक डिमांड होने के कारण इसकी कीमत करीब 30 से 40 लाख रुपये तक होती है। वन विहार के पूर्व सहायक संचालक डॉ. सुदेश वाघमारे के मुताबिक, इस प्रजाति का उल्लू जोड़ा एक साल में 25 हजार चूहे खा सकता है।

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बॉर्न आउल के जीवन संकट का बड़ा कारण

बॉर्न आउल प्रजाति के इस उल्लू को खलिहानी उल्लू इसलिए कहा जाता है क्योंकि, ये खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों एवं रेंगने वाले जीवों को खा लेता है। देखने में इसका पान के समान दिखाई देता है। वैसे तो ये पक्षी पूरी दुनिया में पाया जाता है, लेकिन भारत में इसकी संख्या बेहद कम रह गई है। बता दें कि, दुनियाभर में उल्लू पक्षी की 216 प्रजातियां हैं। इनमें से 16 प्रजातियां सिर्फ बार्न आउल की ही हैं। ये पक्षी कभी अपना घर नहीं बनाता, बल्कि मानव निर्मित किसी वीरान स्थल में रहना पसंद करता है और वहीं अंडे भी देता है। हालांकि, इस पक्षी को किसानों का सबसे बड़ा मित्र कहा जाता है, लेकिन किसानों द्वारा फसलों में डाले जाने वाले कीटनाशकों के कारण इनका जीवन संकट में आ गया है।

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