
पलायन और विस्थापन फुला रहा राजनीतिक दलों का दम
बड़वानी आलोक पण्ड्या की रिपोर्ट....
बड़वानी शहर के बाहर सिलावद पाटी मोड़ पर दोपहर चार बजे गुजरात की एक बस आकर खड़ी हुई। इससे जाने के लिए करीब सौ लोग पहले से खड़े हैं। ये सभी रोजगार के लिए गुजरात जा रहे हैं।
ऐसी बसें पलसूद और राजपुर से भी रोज जाती हैं। इस इलाके से करीब दो हजार लोग रोज गुजरात जा रहे हैं। बस में सवार नाथूलाल बोले, वे साल में आधा वक्त गुजरात के खेतों और फैक्ट्रियों में काम करते हैं। लोग आते हैं और ले जाते हैं। काम भी दिलाते हैं।
बस में नहीं रहती जगह....
पाटी के बद्रीलाल पटेल कहते हैं, इस काम में कुछ बड़े नेता शामिल हैं। चुनाव में वोट डालने के सवाल पर बद्रीलाल बोले, वोट क्या है साहब, पेट पालना पहले जरूरी है। बड़वानी शहर में मोटी माता मंदिर चौराहे पर कैरम क्लब में वे लोग खेल रहे हैं, जिन्हें गुजरात जाने वाली बस में जगह नहीं मिली।
कार्ड तो बना पर फायदा नहीं मिला...
अमर सिंह बोले, पहले सेंधवा में जिनिंग की फैक्ट्रियां थीं तो काम मिल जाता था। एक-एक कर सब बंद हो गई। संबल योजना में कार्ड बना, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं मिला। अमर सिंह, चुनाव को लेकर बोले, कोई भी जीते, हमारे हालात तो यही रहना है।
राजनीति के रावण देखेंगे....
पास ही पान की गुमठी चलाने वाले हुकुमचंद भाऊ बोले, 15 साल पहले नगर पालिका में पक्की दुकान के नाम पर दो हजार रुपए जमा किए थे, दुकान आज तक नहीं मिली। भाऊ चुनाव पर चुटकी लेते हुए बोले, अभी तो नवरात्रि का माहौल है। रावण मारने के बाद राजनीति के रावण देखेंगे।
रंजीत चौक पर मिले दिनेश मालवीय कहते हैं, बड़वानी के अस्पताल में तीन साल पहले आंखफोड़वा कांड हुआ था। तब से यहां के अस्पताल में इलाज कराने से ही डर लगता है।
आज तक बना है पानी का संकट....
गुजरात के सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में बड़वानी के कई गांव आए हैं। ग्रामीणों को यहां से दूसरी जगह भेजा गया है। पुनर्वास वाली एकलेरा बस्ती में कुछ लोग पानी लेकर लौटते मिले। इनमें से प्रकाश चौधरी बोले, यह बस्ती 15 साल पहले बसाई थी, लेकिन पीने के पानी का संकट आज तक है।
यही हाल कसरावद, कुकरा, राजघाट और भीलखेड़ा बसाहट का है। चाय की दुकान चलाने वाले दशरथ ङ्क्षसह सोलंकी को 1995 में विस्थापित कर गुजरात के मिंयागांव और कंबोला में बंजर जमीन दी गई थी। सरकार को मेरे लिए मध्यप्रदेश में जमीन का एक टुकड़ा नहीं मिला तो मैं उसे वोट क्यों दूं।
फसल खराब हो रहीं है....
इसी बीच देवेंद्र ङ्क्षसह नर्मदा की ओर इशारा करते हुए बोले, सरदार सरोवर बांध भरने के लिए यहां पानी रोका गया है। बढ़ता हुआ पानी खेतों में घुसने से फसलें खराब हो रही हैं। बड़वानी और आसपास का इलाका आदिवासी संगठन जयस का गढ़ है। अंजड़ के नारायण पटेल कहते हैं, यहां की चारों सीटें आदिवासी आरक्षित हैं। यहां जयस का असर रहेगा।
निमाड़ के आदिवासी बाहुल जिले बड़वानी के लोगों के लिए वोट डालने से ज्यादा जरूरी पेट पालना है। उनकी जमीनें गुजरात के सरदार सरोवर बांध की भेंट चढ़ गई। पुनर्वास हुआ, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं। रोजगार के साधन दूर तक नहीं हैं। काम के लिए गुजरात पलायन कर रहे हैं। ये दो मुद्दे सियासी दलों के लिए चुनौती हैं।
Published on:
16 Oct 2018 12:31 pm
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