
Child's Kidney Damaged प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
Health news: डिब्बाबंद, तलेभुने और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ बच्चों की किडनी को तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं। भोपाल सहित प्रदेश में बच्चों में किडनी रोग के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 4.9 फीसदी बच्चे और किशोर किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि पिछले एक दशक में इन मामलों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनमें से 2 से 4 प्रतिशत बच्चों को किडनी प्रत्यारोपण तक की जरूरत पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और बढ़ता मोटापा बच्चों में किडनी रोग के प्रमुख कारण बन रहे हैं। इसके साथ ही कम उम्र में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं भी किडनी को प्रभावित कर रही हैं।
सुबह चेहरे, आंखों या पैरों में सूजन
पेशाब में झाग या बदलाव
गहरा रंग या खून आना
भूख न लगना, उल्टी, चिड़चिड़ापन
उम्र के अनुसार वजन या लंबाई का न बढऩा
एम्स में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संस्थान के अनुसार तीन बच्चों को चिन्हित किया गया है और उनके डोनर की जांच व प्री-वर्कअप जारी है। सब कुछ अनुकूल रहा तो अगले माह प्रदेश का पहला बाल किडनी प्रत्यारोपण संभव हो सकेगा।
बता दें कि एम्स भोपाल में बाल डायलिसिस यूनिट बनकर तैयार है, जहां एम्स भोपाल में बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार यह जीवनरक्षक सुविधा शुरू हो जाएगी। एम्स प्रबंधन ने दावा किया है कि बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने भी अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
एम्स में किडनी निकालने लेप्रोस्कोपिक डोनर नेफ्रेक्टोमी तकनीक अपनाई जाएगी। इसमें बड़ा चीरा नहीं लगाना पड़ता है। डोनर जल्दी रिकवर होता है। इससे ट्रांसप्लांट प्रक्रिया सुरक्षित और तेज होगी। बच्चों के ऑपरेशन के लिए जरूरतें अलग होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए यूनिट में उम्र और वजन के अनुसार, मशीनें और फिल्टर लगाए गए हैं।
बच्चों में किडनी रोग का बढऩा चिंताजनक है, क्योंकि यह समस्या पहले वयस्कों में अधिक देखी जाती थी। वहीं डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन समय पर पहचान होने से इलाज की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। डॉ. महेंद्र अटलानी, नेफ्रोलॉजिस्ट
Published on:
24 Mar 2026 01:11 pm
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