
मैंने जिंदगी में एक ही गलती की, किसी से बेपनाह प्यार किया
भोपाल. एमपी नगर थाना क्षेत्र में बीएड की छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमे उसने लिखा है कि मैंने जिंदगी में एक ही गलती कि किसी से बेपनाह प्यार किया। सुसाइड नोट के बाद पुलिस प्रेम-प्रसंग का मामला मान कर जांच कर रही है। सुसाइड नोट में किसी गब्बर का जिक्र किया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
होशंगाबाद जिले के बाबई निवासी नम्रता चौहान पिता दिनेश चौहान (२३) बीएड सेकंड इयर की छात्रा थी। रात में उसने तीन बजे तक अपनी रूम मेट के साथ पढ़ाई की। उसके बाद उसकी रूम मेट अपने कमरे में चली गई। सुबह जब ५.३० बजे उसकी दोस्त उसके कमरे में आई तो देखा कि अंदर से कमरा लॉक है।
दरवाजा नॉक किया लेकिन नहीं खुला। उसके बाद खिड़की से झांककर देखा तो फंदे पर लटक रही थी। तत्काल छात्राओं ने हॉस्टल के वार्डन को इसकी जानकारी दी। उसके बाद गेट तोड़कर छात्रा को फंदे से नीचे उतारा। इस दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने बॉडी को पीएम के लिए भेज दिया। रूप से एक पेज का सुसाइड नोट मिला है। मामले में पुलिस ने पीएम के बाद शव परजिनों को सौंप दिया। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
मैंने तुम्हारी हर गलती माफ कर दी, तुम एक भी...
छात्रा के पास से मिले सुसाइड नोट में उसने लिखा है कि मैंने जिंदगी में सिर्फ चार लोगों को बेहद प्यार किया। मां-पापा, भाई और गब्बर से। आगे उसने लिखा कि मैंने जिंदगी में सिर्फ एक ही गलती की किसी से बेपनाह प्यार किया। मैंने तुम्हारी हर गलती माफ की, लेकिन तुम मेरी एक गलती माफ नहीं कर सके। मां-पापा मुझे माफ कर देना। अपना ख्याल रखना।
प्रदेश के एक फीसदी विद्यार्थियों में हुआ था चयन
सेंट्रल सेक्टर स्कीम ऑफ स्कॉलरशिप कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट में नम्रता का चयन हुआ था। इस स्कॉलरशिप में प्रदेश से सिर्फ एक फीसदी विद्यार्थियों का चयन किया जाना था। इसमे उसका चयन हुआ था और उसे हर साल शासन की ओर से ८० हजार रुपए का स्कॉलरशिप मिलता है। छात्रा के १२वीं में ८८, ग्रेजुएशन में ५९ और एमएससी में ५९ फीसदी अंक आए थे। बीएड सेकंड इयर की पढ़ाई पूरी होने से पहले वो दुनिया से चल बसी।
भाई इफोसिस में पिता Principal हैं
नम्रता के पिता होशंगाबाद के बाबई में मॉडल स्कूल के प्रभारी प्रचार्य हैं। उसका भाई इंफोसिस में इंजीनियर है। नम्रता इकलौती बेटी थी। १९ मई को वो घर गई थी। उसके बाद वो भोपाल चली आई। परिवार के लोगों से भी उसने कुछ भी नहीं बताया था न ही उसके चेहरे से लग रहा था कि वो किसी बात को लेकर परेशान है। आत्महत्या से एक दिन पहले ही माता-पिता से बात हुई थी। इस दौरान भी उसने कुछ भी नहीं बताया।
पिता ने कहा हॉस्टल की हर छात्राएं मेरी बेटी
बेटी की आत्महत्या के बाद पिता काफी टूट गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर हास्टल में रहने वाली छात्राएं मेरी बेटी है। मेरी बच्ची चली गई लेकिन सिस्टम में बदलाव जरूरी है। शासन को ये तय करना चाहिए कि छात्राएं कमरे में अकेली न रहें। इसके साथ ही गल्र्स हॉस्टल में सिर्फ महिलाएं ही पदस्थ रहे। मैं जब भी अपनी बेटी के हॉस्टल गया तो वहां पर लड़कों को खड़े देखा। मेरी बेटी चार दिन चाचा के यहां रही लेकिन प्रबंधन ने एक बार भी मुझे इसकी सूचना नहीं दी। हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
Published on:
29 May 2018 07:53 am

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