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हिंदी में मोहिनीअट्टम, 170 कलाकारों की 12 प्रस्तुतियों में दिखी संस्कृति की झलक

रवीन्द्र भवन में मातृभाषा समारोह-3 का शुभारंभ  

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ravindra bhawan

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भोपाल। रवीन्द्र भवन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मातृभाषा मंच की ओर से मातृभाषा समारोह-3 का का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को पहले दिन भाषायी समाज के बुद्धिजीवी सदस्यों के साथ संज्ञान-7 विमर्श आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर मौजूद थीं। स्वाधीनता संग्राम का सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी स्वरूप विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते ने कहा कि भारत का स्व ही भारत को जिंदा रखता है, यदि यह स्व हमने मिटा दिया तो हम भी कमजोर हो जाएंगे। वहीं, मंत्री ठाकुर ने कहा कि हमें अपने-अपने प्रदेशों में स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वाले सभी वर्गों, श्रेणियों और क्षेत्रों के नायकों की जानकारी जुटाकर नई पीढ़ी को प्रदान करना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी स्वाधीनता का महत्व समझ सके। इस अवसर पर अलग-अलग समाजों के 170 कलाकारों ने 12 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस मौके पर विभिन्न भाषायी समाजों के पारम्परिक व्यंजन स्टॉलों का जायका राजधानीवासियों ने लिया।

25 कलाकारों ने ढाल-तलवार के साथ किया युद्ध

मलयाली समाज के कलाकारों ने मोहिनीअट्टम नृत्य की प्रस्तुति गोस्वामी तुलसीदास रचित हिंदी भाषा के भजन से की, उन्होंने भगवान राम के सुंदर रूपों का वर्णन किया। इसके बाद बंगाली समाज के कलाकारों ने रवीन्द्र नाथ टैगोर की रचना अभिसार पर आधारित नृत्य नाटिका पेश की। वहीं, अरुश्री अरुंकर और साथी कलाकारों ने मराठी भाषी नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। इसमें 25 कलाकारों ने ढाल-तलवार के साथ युद्ध के दृश्य दिखाए।

उडिय़ा नृत्य से भगवान जगन्नाथ का गुणगान

अगली कड़ी में संघमित्रा पाणी ने 14 शिष्याओं के साथ केरी केरी सुना डूबा... पर उडिय़ा नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से भगवान जगन्नाथ का गुणगान किया गया। इसके बाद रेवती शास्त्री ने भरतनाट्यम से पुष्पांजलि की प्रस्तुति दी, जिसमें उनकी 8 शिष्याओं ने देवी-देवताओं को पुष्प अर्पित कर उनका अभिनंदन किया तो वेणुगोपालन और उनके ग्रुप ने आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया, 17वीं सदी के इस नृत्य में नाट्यशास्त्र पर आधारित नृत्य नाटिका पेश की, जिसमें शिव पुत्र गणेश, पवनसुत हनुमान और कृष्ण की सुंदरता को कमल और अमृत के संयोजन से दर्शाया गया। इसकी कंपोजिशन बाला मुरली कृष्णा ने की।