
मास्टर प्लान-2005 में प्रावधान, फिर भी ग्रीन बेल्ट पर कहीं निर्माण तो कहीं कब्जे
भोपाल. मास्टर प्लान-2031 में ग्रीन बेल्ट के लिए 12 हजार हेक्टेयर से अधिक तय किया जा रहा है, लेकिन मास्टर प्लान-2005 में तय ग्रीन बेल्ट लगभग खत्म हो चुका है। शहर से ग्रीन बेल्ट खत्म होने होने से जल स्रोत सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। जानकारों का कहना है कि भोपाल मास्टर प्लान 2005 के प्रावधानों को ईमानदारी से पालन किया जाता है तो तालाब किनारे 50 से 100 मीटर तक सघन हरियाली नजर आती। मौजूदा स्थिति इससे उलट है और यहां बहुमंजिला भवन तान दिए गए हैं। स्थिति ये है कि भोपाल विकास प्राधिकरण के सलैया स्थित प्यारेलाल खंडेलवाल परिसर के सीवेज पम्प हाउस को ग्रीन बेल्ट पर बनाया है। रहवासियों के विरोध को अनसुना कर दिया गया। इसी तरह शहर के तकरीबन सभी क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट को उजाड़ा गया है।
तालाब किनारे निर्माण की अनुमति नहीं थी
मास्टर प्लान-2005 के मुताबिक बड़ा तालाब के 361 वर्ग किमी कैचमेंट एरिया और फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर और कलियासोत नदी के 33 मीटर दायरे में निर्माण नहीं हो सकता। आमोद-प्रमोद के नाम पर भी कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा अमोद-प्रमोद के लिए ली गई जमीन का लैंडयूज बदला जाता है तो प्रस्तावित भूमि की दोगुनी आरक्षित करने का नियम है।
शहर में आकार नहीं ले सके नगर वन
हताईखेड़ा कैचमेंट, शाहपुरा तालाब, केरवा, कलियासोत, कोलार कैचमेंट में नगर वन बनाए जाने थे। शाहजहांनी पार्क, कमला पार्क, किलोल पार्क, नीलम पार्क , 74 बंगला पार्क में भी वन बनाना था। बड़ा बाग को पार्क के रूप में विकसित करना था। हताईखेड़ा, हलाली डैम के उत्तर का क्षेत्र, सिंगारचोली, कलियासोत, केरवा के आसपास के क्षेत्रों समेत शहर किनारे नगर वन का प्रावधान किया था।
ऐसे किया ग्रीन बेल्ट बर्बाद
कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में मकान, दुकान, धार्मिक स्थल, अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के 77 अतिक्रमण हैं। नगर निगम और राज्य सरकार ने ग्रीन बेल्ट में किए गए अतिक्रमणों की सूची एनजीटी को सौंपी थी। कोलार रोड, दानिश कुंज, अमरनाथ कॉलोनी, सर्वधर्म ए, बी सेक्टर और मंदाकिनी कॉलोनी के आसपास के ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण है।
चंदनपुरा शहर से सटा ग्रीन एरिया है। यहां निर्माण की अनुमति नहीं मिल सकती, लेकिन 100 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर समसगढ़ तक निर्माण की अनुमतियां जारी की गईं हैं। वन क्षेत्र में रोड व बड़े निर्माण हो गए।
कलियासोत, केरवा क्षेत्र में वनस्पति उद्यान की व्यवस्था कर चारों किनारों पर ग्रीन स्पेस तय किया गया था। यहां हरियाली तकरीबन खत्म हो गई है। हाल ही में भदभदा से कलियासोत व केरवा क्षेत्र से कई निर्माणों को तोडऩे की प्रशासन ने कार्रवाई की थी, पर वो भी अधूरी।
मास्टर प्लान 2005 में गुलमोहर में 120 फीट चौड़ी रोड प्रस्तावित थी। सड़क के दोनों ओर 20-20 फीट के दायरे में ग्रीन स्पेस तय किया गया। यहां लगे पेड़ काट दिए गए और लोगों ने होटल समेत अन्य बड़े निर्माण कर लिए।
न्यू मार्केट में आईसीएच के सामने सड़क किनारे प्लॉट के सामने प्रति प्लॉट 900 वर्गफीट का ग्रीन स्पेस विकसित करना था। इसका उल्लंघन किया गया और अब इस जगह पर शो-रूम बना दिए गए हैं। अब इन निर्माणों को कानूनी वैधता देने की कोशिश की जा रही है।
चूना भट्टी के खसरा नंबर 94/2 की 1858.74 वर्गमीटर जमीन वनस्पति उद्यान के लिय तय थी। यहां की हरियाली पुलिस थाना भवन बनाने के लिए उजाड़
दी गई।
Published on:
08 Jan 2020 01:11 am
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