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प्रदेश में भी हैं मीराबाई चानू, सुविधाएं-प्रोत्साहन मिले तो प्रतिभाओं में आएगा ‘स्वर्ण’ सा निखार

टोक्यो ओलंपिक में पहला पदक मिलने के बाद पत्रिका ने खिलाडिय़ों से जानी उनकी मन की बात

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प्रदेश में भी हैं मीराबाई चानू, सुविधाएं-प्रोत्साहन मिले तो प्रतिभाओं में आएगा ‘स्वर्ण’ सा निखार

प्रदेश में भी हैं मीराबाई चानू, सुविधाएं-प्रोत्साहन मिले तो प्रतिभाओं में आएगा ‘स्वर्ण’ सा निखार

भोपाल. मप्र में भी वेट लिफ्टिंग के कई खिलाड़ी हैं, जो दिन-रात मेहनत कर प्रतिभा निखारने में लगे हैं। इन्हें सुविधाएं मिले तो ये भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा सकते हैं। यहां 100 से अधिक नेशनल खिलाड़ी के साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल रहे हैं। जरूरत है इनकी प्रतिभाओं को निखारने की। छिंदवाड़ा की नेशनल खिलाड़ी रहीं आकांक्षा कमाले का कहना है कि वेटलिफ्टिंग तपस्या वाला खेल है। जितना प्रैक्टिस करेंगे, लोहा उतना ही साथ देगा। शनिवार को भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू द्वारा टोक्यो ओलंपिक में देश को पहला मेडल दिलाने पर आकांक्षा ने कहा, यह देश के हर खिलाड़ी को गौरवान्वित करने वाला क्षण है। हमारे देश में कई मीराबाई चानू हैं। बस उन्हें जरूरत है सुविधाओं की। छिंदवाड़ा निवासी आकांक्षा अभी जीआरपी में पदस्थ हैं।
पापा की इच्छा को बनाया सपना
आकांक्षा कमाले ने बताया यह खेल पापा पसंद करते थे। उनकी इच्छा थी कि मैं यह खेल खेलूं। पापा ने मुझे वर्ष 2000 में टीवी पर पूरा ओलंपिक खेल देखने को कहा। मैं उस समय आठवीं में पढ़ रही थी। 2003 में पापा का देहांत हो गया। पापा की इच्छी को मैंने अपना सपना बनाया और फिर वेटलिफ्टिंग खेल में दिलचस्पी लेने लगी।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ईशा ने जीता सिल्वर
मुरैना. चंबल मे लड़कियों को जहां पिछड़ा व उपेक्षा भरी निगाहों से देखा जाता था, उसी चंबल से वेट लिफ्टिंग में मुरैना की ईशा सिंह जिला स्तर पर कई गोल्ड मेडल, 2 बार से स्ट्रॉन्ग वुमन ऑफ मप्र और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। ईशा ने 2018, 2019 और 2020 में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था।

इंदौर: संभावनाएं अपार पर सुविधाओं की है दरकार
इंदौर. शहर में स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) का एक भी सेंटर नहीं है और न ही नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पोट्र्स (एनआइएस) का कोई कोच, पर यहां के वेटलिफ्टर्स राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं मेें प्रदर्शन से अचंभित कर चुके हैं। इंदौर की वेटलिफ्टर विदुषी शर्मा और आकाश कौशल पटियाला में अगस्त में होने वाली नेशनल प्रतियोगिताओं के लिए तैयारियां कर रहे हैं। विदुषी ने पांच वर्ष के कॅरियर में कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में सफलताएं अर्जित की है। वहीं दो बार नेशनल चैंपियन रह चुके आकाश भारतीय कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
शाजापुर: शिक्षक पेंशन से जुटा रहा सुविधाएं
शासकीय स्कूल में वेटलिफ्टिंग सेंटर में 50 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। बतौर अध्यापक नियुक्त हुए लीलाधर पाल ने इनके लिए सुविधाएं जुटाने भरपूर प्रयास किया। उन्होंने स्कूल में एक हॉल बनवाकर संसाधन जुटाए। वे रिटायर हो चुके हैं। अब वे पेंशन से खिलाडिय़ों की मदद कर रहे हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली रानी नायक का कहना है सरकार कोच व आधुनिक संसाधन उपलब्ध करा दे तो हम भी पदक ला सकते हैं।