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कोरोनाकाल में अनाथ हुए 963 बच्चे, पालक की भूमिका निभाएगी सरकार

-780 बच्चों को मिली 39 लाख की सहायता, शेष मामले प्रक्रिया में

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कोरोनाकाल में अनाथ हुए 963 बच्चे, पालक की भूमिका निभाएगी सरकार

कोरोनाकाल में अनाथ हुए 963 बच्चे, पालक की भूमिका निभाएगी सरकार

भोपाल. कोरोना काल में प्रदेश के हजारों लोगों ने अपनों को खोया। इस महामारी से माता-पिता की मृत्यु होन से मप्र के 963 बच्चे अनाथ हुए। ऐसे में राज्य सरकार अब इन बच्चों के पालक की भूमिका निभाएगी। वह उनके पालन-पोषण के साथ ही शिक्षा सहित अन्य खर्च उठाएगी। इसी क्रम में सरकार ऐसे 780 बच्चों को 39 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दे चुकी है, वहीं 25 जिलों के 183 अनाथ बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें राहत राशि का इंतजार है। इधर, सरकार कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर अलर्ट है। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए बाल आयोग सक्रिय है। महिला एवं बाल विकास को जिम्मेदारी दी गई है कि वे बच्चों के संपर्क में रहें। जरूरत पडऩे पर उन्हें मदद पहुंचाई जा सके।
बच्चों को हक दिलाने प्रयास शुरू
प्रदेश में कई अनाथ बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता लाखों रुपए की अचल संपत्ति छोड़ गए हैं। आशंका है कि इस पर उनके रिश्तेदार या अन्य लोग संपत्ति हड़प न लें। सरकार ऐसे बच्चों के संबंधियों से संपर्क में है। यदि वे चाहें तो सरकार की निगरानी में इन बच्चों को अपने पास रख सकते हैं।
इन बच्चों को सहायता का इंतजार
सहायता राशि के इंतजार में सर्वाधिक 24 बच्चे जबलपुर के हैं। भोपाल के 12, खंडवा के 17 और इतने ही रतलाम के अनाथ बच्चे हैं। शाजापुर और होशंगाबाद जिले के 11-11 और शेष जिलों में ऐसे बच्चों की संख्या दस से कम है।
5000 रुपए प्रतिमाह पेंशन देगी सरकार
राज्य सरकार ने तय किया है कि जिस परिवार से पिता या कमाने वाले मुखिया का साया उठ गया है, उसे पांच हजार रुपए प्रतिमाह की पेंशन दी जाएगी। बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा का प्रबंध और राशन भी सरकार देगी। यदि किसी परिवार का सदस्या काम-धंधा करना चाहता है तो सरकार की गारंटी पर उसे बिना ब्याज का कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।

टॉप टेन जिले
अनाथ हुए बच्चों के मामले में टॉप-10 जिले
जिला---------अनाथ बच्चे
देवास---------- 50
बालाघाट------ 46
जबलपुर-------44
खंडवा-------42
ग्वालियर------40
होशंगाबाद---- 39
छिंदवाड़ा----- 38
रतलाम------- 37
इंदौर------- 36
भोपाल------ 36