अनाज खरीदी के बाद अब महिलाओं के पास ‘प्राणवायु’ का जिम्मा

-श्योपुर जिले में ऑक्सीजन प्लांट चलाएगा महिला स्व सहायता समूह

By: manish kushwah

Published: 21 Aug 2021, 10:03 PM IST

भोपाल. महिला स्व सहायता समूह को अनाज खरीदी का जिम्मा सौंपने के बाद अब मरीजों को ऑक्सीजन प्लांट चलाने का भी काम दिया जाएगा। इसकी शुरुआत श्योपुर जिले से की गई है। यहां स्व सहायता समूह ने प्लांट संचालित करना शुरू कर दिया है। मालूम हो कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सडक़ निर्माण, बिजली बिल वितरण, वैक्सीनेशन और कोरोना मैनेजमेंट समेत एक दर्जन से अधिक काम किए जा रहे हैं। सरकार महिला स्व सहायता समूहों को बड़ा ब्रांड बनाने के प्रयास में है। इसके चलते विभिन्न सरकारी महकमों के छोटे-छोटेकाम इन समूहों से कराने पर जोर है। फिलहाल एक दर्जन से अधिक विभागों ने महिलाओं को मैदानी स्तर पर काम दिया है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा काम गेहूं उपार्जन का दिया गया। तकरीबन पांच सौ केंद्रों में महिलाओं ने गेहूं खरीदी की। खास बात है कि यहां किसी तरह की गड़बड़ी भी सामने नहीं आई। इसी क्रम में श्योपुर जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को संचालित करने का जिम्मा महिला स्व सहायता समूह को दिया है। इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई है। इसके बाद अन्य जिलों के ऑक्सीजन प्लांट का जिम्मा भी स्व सहायता समूहों को दिया जाएगा।
सफलतापूर्वक कराया वैक्सीनेशन
महिला स्व सहायता समूहों को शहडोल जिले के बुढ़ार के आदिवासी क्षेत्र जुुमुई गांव में वैक्सीनेशन का जिम्मा दिया गया था। इन समूहों ने इस गांव में सौ फीसदी लोगों को वैक्सीन लगाया। इससे उत्साहित स्वास्थ्य विभाग अब इस समूह को अन्य गांवों में वैक्सीनेशन का काम दे रहे हैं।
सडक़ें बनाने का काम भी इनके पास
मंडला और बड़वानी जिले में महिला स्व सहायता समूह सडक़ों का भी निर्माण कर रहा है। इस समूह को सडक़ निर्माण के साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कई अन्य निर्माण कार्यों का भी जिम्मा दिया गया है।
गणवेश निर्माण में भी हाथ आजमा रहे
महिला स्व सहायता समूह गणवेश बनाने का काम भी कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन समूहों को सभी जिलों की स्कूली छात्राओं के गणवेश बनाने का काम दिया है। इसकी मॉनीटरिंग कलेक्टरों के जरिये की जा रही है।

बिजली बिल वितरण का भी जिम्मा
विद्युत वितरण कंपनियों ने बिल वितरण के लिए स्व सहायता समूहों का चयन किया है। प्रदेश के 55 विकासखंडों में यह काम निजी कंपनियों के जरिये कराया जा रहा है, पर धीरे-धीरे ये जिम्मा महिला स्व सहायता समूहों को भी दिया जा रहा है। महिला समूह बालाघाट, सिवनी, सीहोर में पानी के बिल का वितरण और राशि भी संग्रहित करता है।
वर्जन
स्व सहायता समूह से 38 लाख महिलाओं को जोड़ा गयाहै। 25 लाख को और जोड़ा जाएगा। इन सभी महिलाओं को आजीविका से जोडऩे का प्रयास जारी है।
एमएल बेलवाल, प्रबंध संचालक, ग्रामीण आजीविका मिशन, मप्र

manish kushwah Desk
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